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World Radio Day: मन का रेडियो बजने दे जरा.. यहां जानें पूरा सफर

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 13 , 2018 , 14:39 IST

आज वर्ल्ड रेडियो डे है आज ही के दिन रेडियो की पहली बार आवाज़ सुनाई दी थी। विज्ञान से लाभ की बात करे तो सब जगह विज्ञान है और उसके नफा-नुकसान है आज विज्ञान के कारण हमारे बहुत से काम शीघ्र और सुविधापूर्वक हो जाते हैं रेडियो विज्ञान की एक बहुत बड़ी देन है।

मनोरंजन के लिए जरिए बहुत सारे हैं। स्मार्ट फोन, टीवी, कंप्यूटर व इंटरनेट वगैरह-वगैरह, मगर रेडियो की जगह किसी ने नहीं ली। तकनीक के इस तूफान में रेडियो का दीया जलता रहा। मोबाइल फोन में रेडियो सुनने की सुविधा आ जाने इसे फिर से नया जीवन मिला।

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रेडियो से दूर हो रही आज की पीढ़ी एफएम रेडियो के जरिए फिर से जुड़ने लगी है। शहर में बढ़ती एफएम रेडियो चैनल्स की संख्या, तसदीक कर रही है कि नये कलेवर में 'रेडियो' फिर से छा जाने को तैयार है। आइये जानते है आज तक का रेडियो का सफर।

यहां देखें रेडियो का सफर -

1. ली द फोरेस्ट ने 1918 में हाईब्रिज इलाके में दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन शुरु किया था

2. एक साल बाद ली द फोरेस्ट ने 1919 में सैन फ्रैंसिस्को में एक और रेडियो स्टेशन शुरु किया।

3. नौसेना ने 1920 के नवंबर महीने में रेडियो विभाग में काम कर चुके फ्रैंक कॉनार्ड को दुनिया में पहली बार क़ानूनी तौर पर रेडियो स्टेशन शुरु करने की अनुमति मिली।

4. कुछ ही सालों में देखते ही देखते दुनिया भर में सैकड़ों रेडियो स्टेशनों ने काम करना शुरु कर दिया गया।

5. 1936 में भारत में सरकारी ‘इम्पेरियल रेडियो ऑफ इंडिया’ की शुरुआत हुई जो आज़ादी के बाद ऑल इंडिया रेडियो या आकाशवाणी बना।

6. 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत होने पर भारत में भी रेडियो के सारे लाइसेंस रद्द कर दिए गए और ट्रांसमीटरों को सरकार के पास जमा करने के आदेश दे दिए गए।

7. रेडियो पर विज्ञापन की शुरुआत 1923 में हो गई थी।

8. इसके बाद इसी रेडियो स्टेशन ने गांधी जी का भारत छोड़ो का संदेश, मेरठ में 300 सैनिकों के मारे जाने की ख़बर, कुछ महिलाओं के साथ अंग्रेज़ों के दुराचार जैसी ख़बरों का प्रसारण किया जिसे समाचारपत्रों में सेंसर के कारण प्रकाशित नहीं किया गया था।

9.स्वतंत्रता के पश्चात से 16 नवंबर 2006 तक रेडियो केवल सरकार के अधिकार में था। धीरे-धीरे आम नागरिकों के पास रेडियो की पहुँच के साथ इसका विकास हुआ।

10. इन रेडियो स्टेशनों में भी समाचार या समसामयिक विषयों की चर्चा पर पाबंदी है, पर इसे रेडियो जैसे जन माध्यम के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम माना जा रहा है।


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