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वर्ल्ड थैलेसीमिया डे: तेजी से पांव पसार रही है ख़ून की ये बीमारी, भारत में हैं करीब 35 लाख मरीज

icon कुलदीप सिंह | 0
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| मई 8 , 2017 , 17:09 IST | नई दिल्ली

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने सोमवार को कहा है कि देश में थैलेसीमिया के लगभग 35 लाख रोगी मौजूद हैं, और प्रति 25 लोगों में एक व्यक्ति इस रोग का वाहक है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने विश्व थैलेसीमिया दिवस आठ मई को जारी एक बयान में कहा,

भारत में करीब 35 लाख थैलेसीमिया के रोगी मौजूद हैं। थैलेसीमिया दिवस का मकसद लोगों में जागरूकता फैलाना और उन्हें इस रोग के बारे में सूचित व शिक्षित करना है, ताकि इसे रोका जा सके। एक जरूरी बात यह समझने की है कि प्रीनेटल टेस्टिंग के दौरान जेनेटिक काउंसलिंग आवश्यक रूप से की जाए, ताकि परिवार के अन्य शिशु इस रोग के वाहक न बन सकें। इस रोग के बारे में समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने की भी जरूरत है।

 

Thalassemia-test



डॉ. अगवाल ने कहा, "थैलेसीमिया एक वंशानुगत रोग है और इसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है, दवाओं से ठीक नहीं किया जा सकता। यह जानने के लिए व्यक्ति इस रोग का वाहक है या नहीं, रक्त परीक्षण की जरूरत होती है। गर्भवती महिलाओं में, शिशु के जन्म से पूर्व ही प्रीनेटल टेस्ट के जरिए इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। यदि माता-पिता में से किसी एक में भी यह रोग मौजूद है, तो समझदारी होगी कि वे चिकित्सक से परामर्श करें और शिशु को होने वाले संभावित खतरे को टालें। इसके लक्षणों में कमजोरी, थकान, शरीर का धीमा विकास, त्वचा में पीलापन, अजीब सी सूजन, हड्डियों की अजीब सी बनावट, खास कर चेहरे व खोपड़ी की हड्डियों में, हृदय से जुड़ी समस्याएं और शरीर में लौह तत्व की अधिकता आदि आते हैं।"

अग्रवाल ने कहा,

जैसा कि किसी अन्य बीमारी या समस्या के बारे में होता है, थैलेसीमिया रोग के बारे में स्वास्थ्य नीति में परिवर्तन की जरूरत है, ताकि पीड़ितों के साथ न्याय हो सके। दवाओं व इलाज के अभाव में अनेक लोग खास तौर पर बच्चे इस रोग के शिकार हो जाते हैं। स्वास्थ्य नीति ऐसी होनी चाहिए, जिसके तहत देश के कोने-कोने में इस रोग का इलाज व दवाइयां आसानी से उपलब्ध कराई जा सके।



उन्होंने कहा,

इस रोग में अस्थिमज्जा में लाल रुधिक कणिकाओं का निर्माण रुक जाता है। लाल रुधिर कणिकाएं अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी होती हैं। थैलेसीमिया के रोगी को आजीवन नया रक्त चढ़ाने जाने की जरूरत होती है। थैलेसीमिया माइनर से पीड़ित व्यक्ति इस रोग का वाहक होता है और वह बिना किसी चिकित्सा के सामान्य जीवन जी सकता है।



उल्लेखनीय है कि दुनिया में थैलेसीमिया से बड़ी संख्या में लोग पीड़ित हैं। इटली व ग्रीस में यह रोग अधिक पाया जाता है, जिसके चलते इसे मैडिटेरेनियन एनीमिया भी कहा जाता है। आंकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में थैलेसीमिया से करीब 1.5 करोड़ लोग पीड़ित हैं। इसके अलावा, दुनिया भर में बीटा थैलेसीमिया के करीब 24 करोड़ वाहक भी मौजूद हैं, जो दुनिया की कुल जनसंख्या का 1.5 प्रतिशत है। भारत में प्रति 25 लोगों में से एक इस रोग का वाहक है।



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कुलदीप सिंह

Editorial Head- www.Khabarnwi.com Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @JournoKuldeep

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