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मोदी को भारतीय हितों के लिए खड़ा होने वाला नेता मानते हैं जिनपिंग: अमेरिकी एक्सपर्ट

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 8 , 2017 , 15:44 IST | वाशिंगटन

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं, जो भारतीय हितों के लिए खड़े रहने और क्षेत्र में चीन को रोकने के इच्छुक देशों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। ये मानना है एक शीर्ष अमेरिकी विशेषज्ञ का।

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के बोनी एस ग्लेसर ने एक साक्षात्कार में कहा कि मेरा मानना है कि शी जिनपिंग प्रधानमंत्री मोदी को एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं, जो भारतीय हितों के लिए खड़े रहना और क्षेत्र में चीन को रोकने के इच्छुक अन्य देशों, खासतौर से अमेरिका और जापान के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं, और मुझे लगता है कि इसी बात से चीन चिंतित है।

एशिया के लिए वरिष्ठ सलाहकार और वाशिंगटन डीसी स्थित शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक सीएसआईएस में चाइना पावर प्रोजेक्ट की निदेशक ग्लेसर का मानना है कि चीन को भारत के साथ अपने तनावपूर्ण संबंधों से कुछ लाभ होता नजर नहीं आ रहा है।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में शी जिनपिंग दिल्ली गये और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रिश्ते कायम करने की कोशिश की़ मुझे लगता है कि उन्हें उम्मीद थी कि भारत ऐसी नीति अपनायेगा, जो चीनी हितों को चुनौती नहीं देगी, लेकिन दक्षिण चीन सागर में उनकी गतिविधियां जारी रहने के कारण ऐसा नहीं हो पाया।

डोकलाम में घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रही ग्लेसर ने कहा, 'हिंद महासागर और अन्य समुद्री क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच जाहिर तौर पर मतभेद हैं। चीन को भारत के साथ अपने तनावपूर्ण संबंधों से लाभ होता नहीं दिख रहा है। आखिरकार दोनों देशों के बीच लंबी साझा सीमा है।'

गौरतलब है कि चीन ने भारत-भूटान-चीन सीमा के समीप सड़क निर्माण शुरू किया था जिसका निर्माण कार्य भारतीय सेना ने रुकवा दिया था। इसके बाद 16 जून से ही डोकलाम में भारत और चीन के बीच गतिरोध बना हुआ है। ग्लेसर ने कहा कि चीन लंबे समय में अपने लिए भारत को एक मुख्य चुनौती मानता है। चीन को लगता है कि आने वाले समय में भारत एक आर्थिक शक्ति के रूप में विश्‍व के सामने खड़ा होगा। विशेषज्ञ ने कहा कि अगर डोकलाम गतिरोध जारी रहता है तो भारत का रुख और उसके नतीजों का क्षेत्र में अन्य देशों पर बड़ा असर पड़ सकता है खासतौर से उन देशों पर जिनका चीन के साथ सीमा विवाद है।


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