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रामचंद्र गुहा के कहा- 'मोदी की भक्ति से भी बड़ी है बीसीसीआई में कोहली भक्ति'

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 21 , 2018 , 19:53 IST

साउथ अफ्रीका में मौजूदा टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। भले ही सेंचुरियन टेस्ट में भारत की ओर से विराट कोहली ने शानदार 153 रन की पारी खेलकर भारतीयों टीम को उस मैच में बनाए रखा हो, लेकिन बावजूद इसके कोहली अपनी कप्तानी और टीम चयन के फैसलों को लेकर आलोचकों का निशाना बनते दिखाई दे रहे है।

भारतीय इतिहासकार और करीब चार महीने तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित बीसीसीआई की कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (सीएसी) का हिस्सा रहे लेखक रामचंद्र गुहा ने भारतीय कप्तान विराट कोहली और बीसीसीआई दोनों को आड़े हाथों लिया है।

उन्होंने विराट कोहली को भारतीय क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज करार दिया है, लेकिन कोलकाता टेलीग्राफ के लिए लिखे एक लेख में भारतीय कप्तान पर कई सवाल भी उठा दिए हैं।
रामचंद्र गुहा ने लिखा है कि बीसीसीआई विराट कोहली के आगे बौनी पड़ रही है।

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वह विराट कोहली को अपनी सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम का कप्तान बनते देखना चाहती है लेकिन बतौर कप्तान कोहली को अपने अधिकार और अहंकार दोनों में ही विन्रमता लानी पड़ेगी।
गौरतलब है कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों को बीसीसीआई में लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो प्रशासनिक समिति (CoA) नियुक्त की थी, उसमें रामचंद्र गुहा भी सदस्य थे। बाद में उन्होंने इस समिति से इस्तीफा दे दिया था।

हाल ही में रामचंद्र गुहा ने अपना एक लेख 'टेलिग्राफ अखबार' में लिखा है। इस लेख में गुहा ने कोहली की कप्तानी की जमकर आलोचना की है।

अपने इस लेख में रामचंद्र गुहा ने बीसीसीआई के अधिकारियों, सिलेक्टर्स और कोचिंग स्टाफ पर आरोप लगाया है कि ये सभी कोहली भक्ति में चूर हैं और कोई भी फैसला करने से पहले कैप्टन कोहली की सलाह को अहम समझते हैं। इसी कारण टीम इंडिया विदेशी दौरे पर सफल होने से वंचित रह गई।

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अपने इस लेख में गुहा ने कहा, 'बीसीसीआई के अधिकारी कोहली की भक्ति में इस तरह चूर हैं कि शायद भारतीय केबिनेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस तरह नहीं पूजा जाता होगा।' गुहा ने रविशास्त्री को कमजोर कोच कहते हुए लिखा है, 'रवि शास्त्री सरीखे कमजोर कोच की कमियां घरेलू सीरीज के दौरान छिप गईं, लेकिन अब टीम विदेशी दौरों पर है और सच्चाई सामने आने लगी है।'

गुहा ने कोच चयन के मुद्दे पर लिखा, 'सचिन तेंडुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की मौजूदगी वाली सलाहकार समिति, जिसके कामकाज पर विनोद राय की भी नजर थी। उसने अनिल कुंबले को हटाकर रवि शास्त्री जैसे साधारण क्रिकेटर को इसलिए कोच बना दिया क्योंकि कप्तान उन्हें चाहता था।

यह विराट के रुत्बे के आगे समर्पण था।' गुहा ने लिखा कि कोच चुनने के दौरान टॉम मूडी जैसे अनुभवी विकल्प भी थे। इसके बावजूद एक ऐसे शख्स को कोच चुना गया, जिसे कोई अनुभव नहीं था और जिसका क्रिकेटिंग करियर भले लंबा रहा हो, लेकिन उसका प्रदर्शन औसत ही रहा था।

इस मौके पर उन्होंने अनिल कुंबले की तारीफ करते हुए लिखा, 'कुंबले भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े मैच विनिंग बोलर थे। वे अपना कद और भूमिका दोनों को जानते थे। इसलिए वे हर बार कप्तान की बात नहीं मानते थे। वह देश में इकलौते शख्स थे, जो रुतबे में विराट की बराबरी पर रहे। शायद यही उनकी विदाई का कारण भी बना।'

बतौर कप्तान भले ही गुहा ने विराट की जमकर आलोचना की हो, लेकिन बतौर खिलाड़ी उन्होंने विराट की तारीफ भी की है। उन्होंने लिखा कि विराट कोहली भारत के महान बल्लेबाजों में शुमार हैं, जो किसी भी परिस्थिति में शानदार खेल खेलते हैं।

उनका क्लासिक और ओर्थोडोक्स खेल उन्हें टेस्ट क्रिकेट में द्रविड़ और गावसकर की श्रेणी में लाता है। उन्होंने कोहली के सीमित ओवरों के खेल की भी तारीफ की और रन चेज करने के मामले उन्हें सबसे उत्कृष्ट बल्लेबाज बताया।

 


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