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रूस ने लिया बदला! 60 अमेरिकी राजनयिकों को निकाला, कॉन्सुलेट भी बंद

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| मार्च 30 , 2018 , 12:01 IST

रूस के पूर्व जासूस सर्गेई स्कि्रपल को जहर देने के आरोप में अमेरिका और रूस के बीच तनातनी जारी है। रूस ने अमेरीका के 60 राजनयिकों को निकाल दिया है और सेंट पीटर्सबर्ग कॉन्सुलेट को बंद करने का फैसला किया है।

पहले अमेरिका ने रूस के 60 राजनयिकों को देश से निकाला था। अब अमेरिका पर पटलवार करते हुए रूस ने भी अपने देश से यूएस के राजनयिकों को बाहर निकालने का फैसला किया है।

विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने कहा कि अमेरिकी राजदूत को जवाबी कार्रवाई के बारे में सूचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें समान संख्या में राजनयिकों का निष्कासन और सेंट पीर्ट्सबर्ग में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास को बंद करने का हमारा निर्णय शामिल है।

उन्हें देश छोड़ने के लिए एक हफ्त का समय दिया गया है। रूस के विदेश मंत्रालय के अनुसार मॉस्को में तैनात अमेरिका के 58 राजनयिकों के साथ ही येकर्तनबर्ग में दो जनरल कांसुलेट अफसरों को भी निकाला गया है।

बता दें कि पिछले दिनों ने ब्रिटेन में जासूस को जहर दिए जाने के आरोप के बाद अमेरिका ने रूस के 60 राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और सिएटल स्थित रूसी दूतावास को भी बंद कर दिया था। ऐसे में अब रूस के इस फैसले को 'जैसे को तैसा' की तर्ज पर तैयार किया गया बताया जा रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नुअर्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'रूस की प्रतिक्रिया का कोई औचित्य नहीं है। हमारे द्वारा की गई कार्रवाई के पीछे कारण था कि रूसी राजनयिकों पर ब्रिटेन में एक पूर्व जासूस और उसकी बेटी को जहर देकर मारने की कोशिश की गई।' नुअर्ट ने कहा कि रूस के अमेरिकी राजनयिकों को निष्कासित करने के फैसले से पता चलता है कि वह महत्वपूर्ण मामलों में बातचीत को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

उन्होंने कहा, 'इस शाम, राजदूत जॉन हंट्समैन को रशियन फेडरेशन के विदेश मंत्रालय में बुलाया गया। रूस ने हमारे 60 राजनयिकों को निष्कासित कर उन्हें 7 दिन के भीतर देश छोड़ने को कहा है। उन्होंने 48 घंटे के भीतर सेंट पीटर्सबर्ग स्थित दूतावास को भी बंद करने का आदेश दिया है। रूस द्वारा अमेरिका को दी गई सूची से साफ है कि वह उन मुद्दों पर बात करने के लिए इच्छुक नहीं है, जो दोनों देशों के लोगों के लिए मायने रखते हैं।'

उन्होंने कहा कि रूस के राजनयिकों को निष्कासित करने के अमेरिका के फैसले का कई देशों ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा, 'हमने वह कदम सरलता से नहीं उठाया है, बल्कि दुनिया भर में हमारे साथी देशों से बात करने के बाद यह कदम उठाया है। 28 देशों ने इस मामले में अमेरिका का साथ दिया है और 153 रूसी जासूसों को कई देशों से बाहर निकाला गया है।'

उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि अमेरिका की 'न्यायोचित कार्रवाई' की प्रतिक्रिया में रूस ने 'अफसोसजनक और अनुचित' कदम उठाया है। उन्होंने कहा, 'रूस उन 28 देशों के खिलाफ भी अनुचित कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, जो ब्रिटेन की एकजुटता के साथ खड़े हुए थे।'

उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन अभी रूस के फैसले की समीक्षा कर रहा है। प्रशासन के लोग इसे पढ़ेंगे, समझेंगे और फिर इसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा, 'हमें नहीं लगता है कि यह कूट नीतिक रूप से जैसे को तैसा है। ब्रिटेन के नागरिक और उनकी बेटी पर हमले के लिए रूस जिम्मेदार है। उन्होंने एक बार फिर कैमिकल वेपंज कॉन्वेंशन को तोड़ा है। उन्होंने इसके लिए प्रतिबंधित पदार्थ का इस्तेमाल किया।'


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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