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राष्ट्रीय प्रेस दिवस: प्रेस की आजादी के मामले में भारत की रैकिंग दुनिया में लगातार गिर रही नीचे

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 16 , 2018 , 15:29 IST

लोकतंत्र का चौथा स्तभ प्रेस को कहा जाता है। देश में हर साल 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है। प्रेस की आजादी और समाज के प्रति उसकी जिम्‍मेदारियों का प्रतीक है। इस दिन ही भारतीय प्रेस परिषद ने कार्य करना शुरू किया था।

प्रेस समाज का दर्पण

प्रेस समाज का वह दर्पण है जो लोगों को सच और झूठ का आईना दिखाता है। इसलिए जरुरी है कि मीडिया हमेशा किसी भी तथ्य को बिना तोड़े-मरोड़े लोगों के सामने रखे। पत्रकारों की ये जिम्मेदारी बनती है कि वह निष्पक्ष भाव से अपने कार्य करें।

आधुनिक तकनीक के साथ पत्रकारिता में तेजी से बदलाव हो रहें हैं और इसी के साथ बढ़ रही है ढेर सारी चुनौतियां। सोशल मीडिया में फेक न्यूज भी एक बड़ी चुनौती है जिस पर मीडिया से जुड़े सभी कर्णधारों को गंभीरता से विचार करने की जरुरत है।

एक दौर था, जब बच्चे सबसे पहले रोजगार के रूप में सिविल सेवाओं को चुनते थे, फिर उनकी पसंद होती थी बैंक की नौकरी और उसके बाद अन्य सेवाएं। किंतु आज मीडिया के आकर्षण से कोई नहीं बचा है। मीडिया जहां एक ओर जनता की सशक्त आवाज बन कर उभरा है, वहीं वह युवाओं की पहली पसंद भी बनता जा रहा है। ऐसा नहीं कि मीडिया के प्रति यह आकर्षण केवल शहरी क्षेत्रों में ही है, दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी इसके प्रति आकर्षित होकर मीडिया में आते हैं। मीडिया केवल खबरों से ही नहीं जुड़ा है।

मीडिया अपने आप में एक व्यापक शब्द है, जिसमें समाचार, मनोरंजन, ज्ञान, सब कुछ शामिल है। आज आप कोई भी समाचार पत्र ले लें तो इसमें आप अलग-अलग सप्लीमेंट पाएंगे और हर सप्लीमेंट में अलग-अलग विषयों पर सामग्री होती है। आज भी यही कहा जाता है कि यदि आगे बढ़ना है तो अखबार पढ़ो। अखबार मतलब खबरों का पिटारा। आज अखबार का कलेवर कुछ ऐसा है कि इसमें जीवन से जुड़े हर पहलू को समेट लिया जाता है।

अब दूसरी ओर है टेलीविजन और इंटरनेट। टेलीविजन पर समाचार पढ़े जाते हैं, उनका विश्लेषण किया जाता है, मंथन किया जाता है। एक्सपर्ट अपनी अपनी राय देते हैं और इसमें भी ज्ञान और मनोरंजन दिखाया जाता है। कमोबेश कम्प्यूटर पर भी इंटरनेट के माध्यम से आप ई-पेपर पढ़ सकते हैं, समाचार पढ़ सकते हैं, देख सकते हैं। यानी मीडिया में रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, बस आपको अपना विषय चुनना है, अपना क्षेत्र पसंद करना है।
हालांकि दुनिया भर में कई प्रेस और मीडिया काउंसिल हैं लेकिन उनमें भारतीय प्रेस परिषद का एक अलग ही स्‍थान है।

बता दें कि प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी। इसी के परिणामस्वरूप चार जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गई थी। इसने 16 नंवबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तब से देश में प्रतिवर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन प्रेस की स्वतंत्रता एंव जिम्मेदारियों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस का उद्देश्य

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पत्रकारों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्वयं को फिर से समर्पित करने का अवसर प्रदान करता है।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस

प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी. परिणाम स्वरूप 4 जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गई जिसने 16 नवम्बर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तब से लेकर आज तक प्रतिवर्ष 16 नवम्बर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस, प्रेस की स्वतंत्रता एंव जिम्मेदारियों की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट करता है। कुछ इस तरह से प्रेस का आगाज मिलता है-

'यूं लिख रहा हूं अंजाम, जिसका कल आगाज आएगा, लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा'


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