नेशनल

2G घोटाला: CBI कोर्ट 7 नवंबर को करेगी सजा की तारीख का ऐलान, जानिए कब क्या हुआ

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
723
| अक्टूबर 25 , 2017 , 12:07 IST

दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट 2जी स्पेक्ट्रम मामले में फैसले की तारीख का ऐलान 7 नवंबर को करेगी। इसके साथ ही दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने आरोपी फिल्म निर्माता करीम मोरानी और संजय चंद्रा के खिलाफ अदालत में उपस्थित रहने के लिए वारंट जारी कर दिया है।

सीबीआई की स्पेशल अदालत ने सभी आरोपियों की तय तारीख पर कोर्ट में मौजूद रहने के निर्देश जारी किए हैं। देश के बड़े घोटालों में शामिल हुआ 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला यूपीए सरकार के समय साल 2010 में हुआ था।

ए राजा और करुणानिधि की बेटी कनिमोझी के नाम

इस मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा समेत कई दिग्गज लोगों के नाम सामने आए थे। इसमें द्रमुक नेता करुणानिधि की बेटी कनिमोझी तक का नाम शामिल था। इनके अलावा इस मामले में पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के तत्कालीन निजी सचिव आर के चंदोलिया, स्वान टेलीकाम के प्रवर्तक शाहिद उस्मान बलवा व विनोद गोयनका, यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा, रिलायंस धीरूभाई अंबानी ग्रुप आरएडीएजी के तीन अधिकारी - गौतम दोषी, सुरेंद्र पिपारा व हरी नायर के भी नाम शामिल थे।

2g

2010 में आया था 2जी घोटाला

पहली बार 2जी घोटाला सामने साल 2010 में तब आया जब सीएजी की एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े हुए। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को नीलामी की बजाए पहले आओ और पहले पाओ की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें भारत के महालेखाकार और नियंत्रक के अनुसार सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रूपयों का नुकसान हुआ था।

क्या है 2जी घोटला, टाइमलाइन में समझिए पूरा मामला

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में हुई घटनाएं इस प्रकार से हैं

16 मई 2007: ए राजा को दूसरी बार दूरसंचार मंत्री नियुक्त किया गया

25 अक्तूबर 2007: केंद्र सरकार ने मोबाइल सेवाओं के लिए टू जी स्पेक्ट्रम की निलामी की संभावनाओं को खारिज किया
सितम्बर-अक्तूबर 2008: दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए

15 नवंबर 2008: केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में खामियां पाईं और दूरसंचार मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की

21 अक्तूबर 2009: सीबीआई ने टू जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए मामला दर्ज किया

A raja

22 अक्तूबर 2009: मामले के सिलसिले में सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर छापेमारी की

17 अक्तूबर 2010: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दूसरी पीढ़ी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया

नवंबर 2010: दूरसंचार मंत्री ए राजा को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने संसद की कार्यवाही ठप्प की

14 नवम्बर 2010: राजा ने इस्तीफा दिया

15 नवम्बर 2010: मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया

नवम्बर 2010: टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर संसद में गतिरोध जारी रहा

13 दिसम्बर 2010: दूरसंचार विभाग ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने के लिए अधिसूचित किया. इसे दूरसंचार मंत्री को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया

24 और 25 दिसम्बर 2010: राजा से सीबीआई ने पूछताछ की

31 जनवरी 2011: राजा से सीबीआई ने तीसरी बार फिर पूछताछ की. एक सदस्यीय पाटिल समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

2 फरवरी 2011: टू जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया

 

 


कमेंट करें