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तीन अलग-अलग कहानियों से रिश्तों का ताना बाना दिखाती है '3 स्टोरीज'

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 9 , 2018 , 12:51 IST

रेणुका शाहणे 14 साल बाद फिल्म '3 स्टोरीज' से अपना कमबैक कर रही हैं। इस फिल्म में वो अपने पुराने सभी किरदारों से अलग नजर आ रही हैं। फिल्म 3 स्टोरीज तीन अलग-अलग कहानियों को दर्शाती है और ये तीनों कहानियां मुंबई के एक मध्यम वर्गीय इलाके में बेस्ड हैं। जो कि एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिल्म की कहानी सामान्य है, लेकिन इस फिल्म से डेब्यू कर रहे अर्जुन मुखर्जी ने सामान्य सी कहानी को भी बहुत बेहतर तरीके से फिल्माई है।

कहानी-

यह कहानी मुंबई के मायानगर इलाके से शुरू होती है जहां रहने वाली फ़्लोरी मेंडोंसा (रेणुका शहाणे) को अपना घर बेचना है और उसकी खरीददारी के लिए सुदीप (पुलकित सम्राट) आता है। घर का दाम वैसे तो 20 लाख है लेकिन फ़्लोरी उसे 80 लाख में बेचना चाहती है। वहीं दूसरी तरफ वर्षा (मसुमेह मखीजा) और शंकर वर्मा (शरमन जोशी) की लव स्टोरी भी चलती रहती है। लेकिन वर्षा की शादी किसी और से हो जाती है। मायानगर इलाके की तीसरी कहानी रिजवान (दधि पांडे) के बेटे सुहेल (अंकित राठी) और मालिनी (आएशा अहमद) की लव स्टोरी है। इन तीनों कहानियों का एक दूसरे से बड़ा गजब नाता होता है। इन सबके बीच लीला (ऋचा चड्ढा) का क्या रोल होता है। यह कहानी का दिलचस्प मोड़ है, जिसके बारे में जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

डायरेक्शन-

फिल्म का डायरेक्शन , रीयल लोकेशन के साथ बहुत बढ़िया है, सिनेमेटोग्राफी और फिल्म की एडिटिंग भी अच्छी है। डायरेक्टर अर्जुन मुखर्जी ने बड़े ही अच्छे तरीके से एक सोसाइटी में होने वाली हलचल को दर्शाया है और वहां की कहानी को अपने अंदाज में पिरोकर दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की है। फिल्म की कहानी तो अच्छी है लेकिन उसे बताने में काफी वक्त फिल्ममेकर की तरफ से लगाया गया है और यह वक्त अगर कम किया जाता तो फिल्म और भी क्रिस्प हो जाती और आप को बांधे रखने में सक्षम हो पाती। फिल्म की एक खास तरह की ऑडियंस है जो इसे पसंद कर पाएगी और यही कारण है कि यह मास फिल्म में होकर के क्लास फिल्म कहलाएगी। फिल्म का क्लाइमेक्स भी शायद सबको पसंद ना आए क्योंकि वह काफी हटकर है।

परफॉर्मेंस-

क्योंकि सबसे अच्छी बात उसकी कास्टिंग है जिसमें रेणुका शहाणे काफी अलग अंदाज में दिखाई देती हैं जैसा कि आपने ट्रेलर में भी देखा होगा और वह जिस तरह से अपनी भाषा पर नियंत्रण रखती हैं वह बात काफी काबिले तारीफ है वहीं दूसरी तरफ उनकी सम्राट ने भी अच्छा अभिनय किया है शर्मन जोशी के साथ-साथ मसुमेह मखीजा ,अंकित राठी और आयशा खान ने भी अच्छा काम किया है। दधि पांडे के साथ-साथ बाकी और भी किरदारों ने सहज अभिनय किया है। फिल्म में बाल कलाकारों ने भी डायरेक्टर के द्वारा बताए गए संकेतों के हिसाब से अच्छा काम किया है। वैसे तो रिचा चड्ढा इस फिल्म में कैमियो करती हुई नजर आती है लेकिन किरदार में पूरी तरह से दिखाई देती हैं।

कमजोर कड़ियां-

फिल्म लगभग 1 घंटे 40 मिनट की है लेकिन रफ़्तार काफी धीमी है। जिसे थोड़ा और बेहतर किया जा सकता था। फिल्म की रिलीज से पहले कोई भी गाना अलग से उभरकर सामने नहीं आया है। अगर ऐसा होता तो दिलचस्पी का लेवल और ज्यादा होता।

म्यूजिक-

फिल्म का संगीत ठीक-ठाक ही है और जब वह फिल्म के दौरान आता है तो रफ्तार को कमजोर भी करता है एक-दो हिट गाने होते तो शायद दर्शकों का रुझान और बढ़ता।

देखें या नहीं-

रेणुका शहाणे, शरमन जोशी के अच्छे अभिनय और बढ़िया कहानी के लिए एक बार जरूर देख सकते हैं। यह एक कमर्शियल या मसाला फिल्म नहीं है लेकिन इसकी एक खास तरह की ऑडियंस है, जो देखने जरूर जाएगी।


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