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सबरीमाला: कौन हैं भगवान अयप्पा, क्या है मंदिर के नियम, जानें सबकुछ

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 28 , 2018 , 17:07 IST

सबरीमाला मंदिर यानि श्री अय्यप्पा मंदिर केरल राज्य के पतनमतिट्टा ज़िले में है। ये प्राचीनतम मंदिरों में से एक माना जाता है। दक्षिण पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान अयप्पा को भगवान शिव और मोहिनी (भगवान विष्णु का रूप) का पुत्र माना जाता है। जिनका नाम हरिहरपुत्र भी है। कहा जाता है कि इस मंदिर में भगवान की स्थापना स्वयं परशुराम ने की थी और यह विवरण 'रामायण' में भी मिलता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य भगवान विश्वकर्मा के सान्निध्य में पूरा हुआ। बाद में परशुराम जी ने मकर संक्रांति के दिन यहां भगवान की स्थापना की। हिन्दु, मुस्लिम और ईसाई सहित सभी धर्मों के लोग यहां दर्शन करने आते हैं।

ये है इस मंदिर में दर्शन की प्रक्रिया

1- ये मंदिर श्रद्धालुओं के लिए साल में सिर्फ नवंबर से जनवरी तक खुलता है। बाकी महीने इसे बंद रखा जाता है।

2- भक्तजन पंपा त्रिवेणी में स्नान करते हैं और दीपक जलाकर नदी में प्रवाहित करते हैं। इसके बाद ही शबरीमलै यानी सबरीमाला मंदिर जाना होता है।

3- पंपा त्रिवेणी पर गणपति जी की पूजा करते हैं। उसके बाद ही चढ़ाई शुरू करते हैं। पहला पड़ाव शबरी पीठम नाम की जगह है। कहा जाता है कि यहां पर रामायण काल में शबरी नामक भीलनी ने तपस्या की थी। श्री अय्यप्पा के अवतार के बाद ही शबरी को मुक्ति मिली थी।

4- इसके आगे शरणमकुट्टी नाम की जगह आती है। पहली बार आने वाले भक्त यहाँ पर शर (बाण) गाड़ते हैं।

5- इसके बाद मंदिर में जाने के लिए दो मार्ग हैं। एक सामान्य रास्ता और दूसरा अट्ठारह पवित्र सीढ़ियों से होकर। जो लोग मंदिर आने के पहले 41 दिनों तक कठीन व्रत करते हैं वो ही इन पवित्र सीढ़ियों से होकर मंदिर में जा सकते हैं।

6- अठारह पवित्र सीढ़ियों के पास भक्तजन घी से भरा हुआ नारियल फोड़ते हैं। इसके पास ही एक हवन कुण्ड है। घृताभिषेक के लिए जो नारियल लाया जाता है, उसका एक टुकड़ा इस हवन कुण्ड में भी डाला जाता है और एक अंश भगवान के प्रसाद के रूप में लोग अपने घर ले जाते हैं।

7- शबरीमलै मंदिर में भगवान की पूजा का एक प्रसिद्ध अंश घी का अभिषेक करना है। श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए घी को सबसे पहले एक खास बर्तन में इकट्ठा किया जाता है, फिर उस घी से भगवान का अभिषेक किया जाता है।

कैसा है शबरीमलै मंदिर परिसर

1- शबरीमलै मंदिर परिसर में श्री अय्यप्पा स्वामी का मंदिर मुख्य है, जिसके सामने पवित्र अठारह सीढ़ियाँ हैं। ऊपरी सतह पर कन्नीमेल गणपति और नागराज की प्रतिमा है। निचली सतह पर एक मुसलमान संत बाबर स्वामी, जो भगवान अय्यप्पा के भक्त थे, और कुरुप स्वामी की प्रतिमा है।

2- उत्तर-पश्चिम की ओर श्री मल्किकापुरतम्मा देवी, नवग्रह देवत, मलनटयिल भगवती, नाग देवता इत्यादि के मंदिर हैं।

3- मंदिर परिसर में उत्तर की ओर नागराज और नागयक्ष की मूर्तियाँ है। संतान प्राप्ति के लिए यहां सर्पगीत गाए जाते हैं।

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मंदिर में दर्शन करने के हैं कठिन नियम

1- भक्तों को यहाँ आने से पहले इकतालीस दिन तक समस्त लौकिक बंधनों से मुक्त होकर ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी है।

2- इन दिनों में उन्हें नीले या काले कपड़े ही पहनने पड़ते हैं।

3- गले में तुलसी की माला रखनी होती है और पूरे दिन में केवल एक बार ही साधारण भोजन करना होता है।

4- शाम को पूजा करनी होती है और ज़मीन पर ही सोना पड़ता है।

5- इस व्रत की पूणार्हूति पर एक गुरु स्वामी के निर्देशन में पूजा करनी होती है।

6- मंदिर यात्रा के दौरान उन्हें सिर पर इरुमुडी रखनी होती है यानी दो थैलियां और एक थैला। एक में घी से भरा हुआ नारियल व पूजा सामग्री होती है तथा दूसरे में भोजन सामग्री। ये लेकर उन्हें शबरी पीठ की परिक्रमा भी करनी होती है, तब जाकर अठारह सीढियों से होकर मंदिर में प्रवेश मिलता है।

कौन हें भगवान अयप्पा

दक्षिण पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान अयप्पा को भगवान शिव और मोहिनी (भगवान विष्णु का रूप) का पुत्र माना जाता है। जिनका नाम हरिहरपुत्र भी है।

अय्यप्पा स्वामी को माना जाता है ब्रह्मचारी

केरल में शैव और वैष्णवों में बढ़ते वैमनस्य के कारण एक मध्य मार्ग की स्थापना की गई थी। जिसमें अय्यप्पा स्वामी का सबरीमाला मंदिर बनाया गया था। इसमें सभी पंथ के लोग आ सकते थे। दक्षिणी मान्यता के अनुसार भगवान अयप्पा स्वामी को ब्रह्मचारी माना गया है, इसी वजह से मंदिर में उन महिलाओं का प्रवेश वर्जित था जो रजस्वला हो सकती थीं।

 


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