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9/11: वो खौफनाक मंजर जिसे दुनिया कभी भूल नहीं पाएगी, गई थीं 3000 से ज्यादा जानें

icon अमितेष युवराज सिंह | 1
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| सितंबर 11 , 2018 , 11:40 IST

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 11 सितंबर 2001 इतिहास का वो काला दिन था जिसमें दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें हुई। करीब 3000 लोगों की मौतें इस हमले में हुईं थी जिसके बाद अफगानिस्तान और इराक में जो युद्द लड़े गए उनमें लाखों लोगों की मौत के साथ कई पीढ़ियों को भी तबाह कर दिया।

बता दें कि इस हमले के बाद दुनिया में इस्लामोफोबिया ने माहौल ख़राब किया तो अमेरिका से लड़ने के नाम पर अल कायदा के बाद ISIS जैसे कट्टरपंथी आतंकवादी संगठन खड़े हो गए। लीबिया तक सीमित जंग आज सीरिया से होते हुये पूरे यूरोप में पहुंच गई है जिससे आस-पास के सभी देशों में लगातार गृह युद्ध की स्थिति बनी हुई है।

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आखिर क्या हुआ था उस दिन?

- 11 सितंबर दुनिया के लिए वो खोफनाक रात थी जिस दिन 3000 से ज्यादा जानें गई। आज 9/11 हमले की 17वीं बरसी है। 11 सितंबर के दिन आंतकी संगठन अल कायदा के 19 आतंकियों ने अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और पेन्सिलवेनिया में दुनिया के सबसे बड़े और प्रभावी आतंकी हमले को अंजाम दिया था।

- आतंकियों ने चार पैसेंजर एयरक्राफ्ट हाईजैक किए थे जिनमें से तीन प्लेन सही निशाने पर लगे जबकि चौथा प्लेन पेन्सिलवेनिया में क्रैश हो गया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस हमले में 2983 लोगों की मौत हुई थी।

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- आतंकियों ने दो यात्री विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर टावर में भिड़ा दिए थे। अमेरिकन एयरलाइन्स फ्लाइट 11 में चढ़े आतंकी मोहम्मद अटा ने साथियों के साथ प्लेन को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टावर के 93-99 फ्लोर और यूनाइटेड एयरलाइन्स फ्लाइट 175 को साउथ टावर के 75-85 फ्लोर से क्रैश कर दिया था। इस क्रेश में सारे पैसेंजर्स तो मारे ही गए, बिल्डिंग में भी सैकड़ों लोगों की मौत हो गई।

- तीसरे विमान फ्लाइट 77 को आतंकियों ने वॉशिंगटन डीसी में पेंटागन के वेस्टर्न हिस्से पर हमला किया। इस हमले में 59 पैसेंजर्स के साथ-साथ 125 मिलिट्री और 400 पुलिस अफसरों की मौत हुई थी।
- इस हमले में मरने वालों में 57 देशों के लोग शामिल थे।

हमले के पीछे अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का हाथ था। हमले का बदला लेते हुए अमेरिका ने 2 मई, 2011 को पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा को मार गिराया था। अमेरिका सहित पूरी दुनिया को झकझोर देने वाले इस हमले के बाद अमेरिका ने अपनी सुरक्षा नीतियों में कड़े बदलाव किए।

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अमेरिका में अब वो माहौल नहीं रहा जो 9/11 के तुरंत बाद था। दो जंगे जो इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में बग़ैर किसी वजह की लड़ी गई उससे अमरीका को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

ओसामा के मौत के बाद उसकी मां ने क्या कहा

11 सितंबर के बाद अलकायदा आंतकी सरगना ओसामा के मौत के सात साल बाद उसकी मां ने पहली बार अपने बेटे के बारे में सार्वजनिक तौर पर बात की हैा एक ब्रिटिश अखबार ने ओसामा की मां आलिया गानेम से जेद्दा स्थित उनके खानदानी घर पर बातचीत के दौरान बताया कि उनका बेटा बचपन में शर्मीला और अच्छा बच्चा था मगर यूनिवर्सिटी में ब्रेनवॉश करके जबरन उसके विचार बदल दिए गए। उन्होंने आखिरी बार 1999 में ओसामा को अफगानिस्तान में देखा था। यह 9/11 की घटना से दो साल पहले की बात है।

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प्रभावशाली परिवार

ओसामा का परिवार सऊदी अरब के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक है। इस परिवार ने निर्माण के कारोबार से संपत्ति जोड़ी है। ओसामा के पिता मोहम्मद बिन अवाद बिन लादेन ने आलिया गानेम को ओसामा के जन्म के तीन साल बाद तलाक दे दिया था। इसके बााद उन्‍होंने दूसरी शादी ली और अपना दूसरा परिवार बसा लिया था, ओसामा उन्हीं के साथ रहता था। अवाद बिन लादेन के 50 से ज्यादा बच्चे हैं।

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जेहादी बनने पर प्रतिक्रिया

आलिया को जब पता चला कि उनका बेटा जेहादी बन गया है तो वो बहुत परेशान थे। वो आगे बताई थी कि उन्हें विश्वास नही हो रहा था कि वो कैसे सब बर्बाद कर सकता था? यह सुनकर वो सन्न रह गई थी।

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भयानक नतीजे की भी थी चिंता

एक इंटरव्यू के दौरान ओसामा के दो भाई हसन और अहमद ने हमले के 48 घंटे के अंदर ही उसे पता हो गया था कि इसके पीछे ओसामा का ही हाथ है। अमेरिका पर हुए हमले के बाद घर के हर छोटे-बड़े सदस्य को उनपर शर्म आ रही थी। हम सब जानते थे कि हमें इसके भयानक नतीजे भुगतने होंगे। हमारे परिवार के सभी सदस्य दुनिया में जहां भी थे, वहां से सऊदी लौट आए थे।

बता दें कि आलिया 9/11 हमलों के 17 साल बाद भी ओसामा बिन लादेन के बजाय उनके साथ के लोगों को जिम्मेदार मानती हैं।

ब्रेनवाश से ऐसा बना था ओसामा

जब ओसामा 20 साल के आसपास था तो वह काफी मजबूत, प्रेरित और पवित्र था लेकिन बाद में वह बदल गया। जेद्दा की किंग अब्दुल्लाजीज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही ओसामा कट्टरपंथी बना। बेटे के बचपन को याद करते हुए गानेम ने बताया, 'यूनिवर्सिटी के लोगों ने उसे बदल दिया। वह एक अलग आदमी बन गया। वहां वह अब्दुल्ला अजाम नाम के एक शख्स से मिला, जो मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य था, जिसे सऊदी अरब से निर्वासित कर दिया गया था और बाद में वह ओसामा का धर्मगुरु बना।'

गानेम ने आगे बताया, 'वह बहुत अच्छा बच्चा था जब तक वह कुछ ऐसे लोगों से नहीं मिला था जिन्होंने उसका ब्रेनवॉश किया। उन्हें ऐसा करने के लिए पैसे मिलते थे। मैंने हमेशा ओसामा को ऐसे लोगों से दूर रहने को कहा और उसने कभी भी स्वीकार नहीं किया कि वह क्या कर रहा था, क्योंकि वह मुझसे बहुत प्यार करता था।

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1980 के दशक के शुरुआती सालों में ओसामा रूस के कब्जे के खिलाफ लड़ने अफगानिस्तान पहुंचा। गानेम ने बताया, 'शुरुआती दिनों में ओसामा से जो भी मिलता था वह उसका सम्मान करता था। शुरू में, हमें उसपर बहुत गर्व होता था। यहां तक कि सऊदी सरकार भी उसके संग बहुत अच्छे संबंध रखती थी और फिर सबके सामने आया 'ओसामा द मुजाहिद'।'

पाकिस्‍तान के ऐबटाबाद में ओसामा को किया था ढेर

लादेन को अमेरिकी सैनिकों ने पाकिस्तान में घुसकर 2 मई 2011 को मार गिराया था। इस ऑपरेशन की सातवीं वर्षगांठ पर लादेन को गोली मारने वाले अमेरिकी नेवी सील के कमांडो रॉब ओ नील ने कहाथा कि 'हमारे दल में शामिल सभी कमांडो मान चुके थे कि वह मरने वाले हैं। उन्होंने अपने घर वाले को अलविदा भी कह दिया था। नील का कहना था लादेन के गढ़ में पहुंचने पर कमांडो को लगा था कि यह ऑपरेशन उनका आखिरी ऑपरेशन होगा।

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एक साक्षात्कार में नील ने कहा था कि, मिशन पूरा कर जब हम सभी हेलीकॉप्टर में वहां से निकले तब लगा कि हमारी जान बच सकती है। पायलट ने संदेश दिया कि हम अफगानिस्तान में हैं। यह सुनने के बाद लगा कि हमने कर दिखाया।' उस वक्त यह एक गर्व की बात थी। ऐसी टीम का हिस्सा होना मेरे लिए सम्मान जनक है।'


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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