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साउथ एक्ट्रेस ने खोली पोल, कहा- मुझे आपस में बांटना चाहते थे 5 प्रोड्यूसर्स

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| जनवरी 19 , 2018 , 15:59 IST

फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच को लेकर अब एक और एक्ट्रेस ने आवाज उठाई है।कन्नड़ फिल्मों की जानी मानी एक्ट्रेस श्रुति हरिहरन ने कास्टिंग काऊच को लेकर चौकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कास्ट‍िंग काउच से जुड़े अपने अनुभव शेयर किए हैं। श्रुति ने अपनी पहली फिल्म का वो डरा देने वाला अनुभव शेयर किए, जिसके बाद उन्हें फिल्म ही छोड़नी पड़ी।

श्रुति हरिहरन ने बताया कि वे अपनी पहली फिल्म के दौरान सिर्फ 18 साल की थी। जब वे कोरियोग्राफर के पास गई और कहा कि वे वह सब नहीं कर सकतीं, जो उनसे कहा जा रहा है, इसके बाद कोरियोग्राफर ने कहा कि यदि ये सब हैंडल नहीं कर सकतीं तो तत्काल दफा हो आओ। ये सुनकर श्रुति की आंखों में आंसू आ गए। वे डर गई और आखिरकार उन्हें फिल्म छोड़ना पड़ा।

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श्रुति ने काउस्ट‍िंग काउच का एक अनुभव सुनाते हुए कहा, एक तमिल फिल्मकार मेरी ही कन्नड़ फिल्म का रीमेक बनाना चाहते थे। उन्होंने मुझे ही इसके लिए साइन किया। टेलीफोन पर उन्होंने मेरे सामने अजीब शर्त रखी।

प्रोड्यूसर ने फिल्म देने के लिए कहा कि फिल्म में 5 प्रोड्यूसर हैं और वह किसी भी तरह से मेरा इस्तेमाल कर सकते हैं। ये सुनकर मैं हैरान रह गई।

श्रुति ने इन बातों का खुलासा इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2018 में किया। कॉन्क्लेव में ‘सेक्स‍िज्म इन सिनेमा: टाइम टू एंड पेट्रीआर्की’ के मुद्दे पर बहस हो रही थी। श्रुति हरीहरन ने इस विषय पर खुद के अनुभव को शेयर किया। श्रुति ने कहा कि, ‘फिल्मों में लड़कियों के किरदार को हमेशा समाज में उसके लिए प्रचलित भावनाओं के आधार पर उतारा जाता है। अधिकतर फिल्मों में लड़कियों को बतौर कमोडिटी शूट किया जाता है, जिससे वह देखने में सुन्दर, सेक्सी लगें और फिल्म चलने की संभावना बढ़ जाए।’ बकौल श्रुति, ‘फिल्मों में महिलाओं को फैसला लेने की भूमिका में नहीं रखा जाता है।

श्रुति ने कहा कि, ‘महिलाओं का चुप रहना अब कोई विकल्प नहीं है। पब्लिक स्पेस महिलाओं के लिए उपलब्ध नहीं है, क्योंकि समाज पूरी तरह से पुरुष प्रधान है, लेकिन फिल्मों में महिलाओं की मौजूदगी से उम्मीद की जा सकती है कि महिलाएं पब्लिक स्पेस में अपने लिए जगह बना रही हैं।’

श्रुति ने आगे कहा, ‘ज्यादातर लड़कियों को कास्टिंग काउच का सामना ‘ना’ कहकर करने की जरूरत है। इसके लिए सिर्फ पुरुषों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कास्टिंग काउच से पहला मौका जरूर मिलता है लेकिन इसके सहारे करियर नहीं बनाया जा सकता।’


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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