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विश्व जल दिवस: कैसे सुधरेगी हालत? देश में 16 करोड़ लोगों के पास पीने का स्वच्छ पानी नहीं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 22 , 2018 , 14:12 IST

साल 1993 में आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें लिखा था कि 22 मार्च को विश्व पानी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिवस का मकसद था कि लोग इससे कुछ सीख लेकर अपने अस्तित्व के लिए पानी का अस्तित्व बरकरार रखेंगे।

लेकिन आज 25 साल बाद भी हमें कुछ बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है, इसमें गलती हमारी आपकी सब की है। हम पानी के महत्व को समझ नहीं पा रहे हैं, जिसके कारण हम तो अपना जीवन व्यतीत कर लेंगे पर हमारी आने वाली पीढ़ी कैसे बिना पानी के रह पायेगी।

आज दुनिया के ऊपर जल संकट मंडरा रहा है। स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स वाटर की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 84.4 करोड़ लोगों के पास स्वच्छ जल की सुविधा नही है। वहीं, भारत में 16.3 करोड़ लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिलता। घटते भूजल स्तर एवं प्रदूषण भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया की दो सर्वाधिक आबादी वाले देश चीन और भारत ने साल 2000 के बाद से सबसे ज्यादा लोगों को साफ पानी मुहैया कराया है लेकिन जलसंकट से जूझ रहे दुनिया के दस शहरों में भारत का बेंगलुरु भी है। यहां 2030 तक स्थिति भयावह हो जायेगी। सेंटर फॉर सांइस की ‘डाउन टू अर्थ’ रिपोर्ट में बेंगलुरु को भारत का केपटाउन बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार युगांडा, नाइजर, मोजाम्बिक, भारत और पाकिस्तान उन देशों में शामिल हैं जहां सबसे ज्यादा लोगों के पास आधे घंटे की आने- जाने की दूरी के दायरे में साफ पानी नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव

हर व्यक्ति को अपनी और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी सुलभ होना चाहिए। इसके लिए प्रति व्यक्ति प्रति दिन के लिए 50 से 100 लीटर पानी का मानक तय किया गया है। यह पानी साफ, स्वीकार्य और सस्ता होना चाहिए। परिवार की आय के तीन फीसद से ज्यादा पानी की कीमत नहीं होनी चाहिए। पानी का स्नोत व्यक्ति के घर से 1000 मीटर से ज्यादा दूर नहीं होना चाहिए। पानी एकत्र करने के लिए 30 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए।

वेटलैंड्स की ज़रूरत

इस विश्व में वेटलैंड्स (दलदल या नम स्थान) की महज 2.6 फीसद हिस्सेदारी है। लेकिन जल चक्र में इनकी बहुत योगदान होता है। ये छन्नी की तरह काम करते हैं। कीटनाशकों, औद्योगिक और खानों के हानिकारक तत्वों को छानकर पानी की गुणवत्ता दुरुस्त करते हैं। केवल वेटलैंड्स पानी में मौजूद सभी तत्वों में से 20-60 फीसद को अलग कर देते हैं।

बारिश के पानी का 80 से 90 फीसद हिस्सा धरती के गोद में भेजते हैं। कुछ देशों में तो औद्योगिक कचरे को शोधित करने के लिए वेटलैंड्स बनाए गए हैं। यूक्रेन में कृत्रिम वेटलैंड्स बनाकर दवा उत्पादों के कचरे को साफ किया जाता है।


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