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प्रशांत पटेल से मिलिये, इनकी वजह से 'आप' के 20 विधायकों की सदस्यता चली गई

अमितेष युवराज सिंह | न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जनवरी 21 , 2018 , 17:44 IST

आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई है। इससे दिल्ली की केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की सिफारिश को हरी झंडी दे दी है। चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी और मंजूरी के लिए उसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया था। आप के सभी 20 विधायकों पर लाभ का पद लेने का आरोप लगा था।

कैसे लगा 20 विधायकों को झटका

लाभ का पद लेने को लेकर वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास अर्जी भेजी थी। 19 जून 2015 को उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सामने याचिका दायर कर संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद राष्ट्रपति ने इस मामले को चुनाव आयोग के पास भेज दिया है।

कौन हैं प्रशांत पटेल

युवा वकील प्रशांत पटेल की वजह से आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द हो गई है। 30 साल के प्रशांत ने साल 2015 में वकालत शुरू की थी। प्रशांत पटेल ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी के बाद नोएडा के एक कॉलेज से एलएलबी किया है। वह इसके पहले बॉलीवुड एक्टर आमिर खान और डायरेक्टर राजकुमार हिरानी के खिलाफ भी फिल्म PK में हिंदू देवी देवताओं का गलत चित्रण करने को लेकर एफआईआर दर्ज करा चुके हैं। प्रशांत पटेल उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के रहने वाले हैं।

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ये है पूरा मामला

आम आदमी पार्टी ने अपने 20 विधायकों को संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया था। इसके बाद आरोप लगा कि ये पद लाभ का पद है। आयोग द्वारा अयोग्य करार देने पर आप विधायकों का कहना है कि फैसला देने से पहले उन्हें पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। उधर, प्रशांत पटेल ने बताया कि 14 जुलाई, 2016 से 27 मार्च, 2017 तक इस मामले में कुल 11 सुनवाई हुई।

उन्होंने कहा कि सभी सुनवाई ढाई से तीन घंटे की हुई। पटेल ने कहा कि ऐसे में आप विधायकों द्वारा यह कहना कि आयोग में पक्ष रखने का उन्हें मौका नहीं दिया गया, यह काफी हास्यास्पद है। शिकायतकर्ता पटेल ने कहा कि लाभ के पद मामले में सभी 21 विधायक अपने वकीलों के माध्यम से आयोग में पक्ष रख चुके हैं। आयोग ने उन्हें मौखिक और लिखित में पक्ष रखने का भरपूर मौका दिया।

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अब दिल्ली में क्या होगा

आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता समाप्त होने के बाद दिल्ली एक छोटा विधानसभा चुनाव देख सकती है, जिसमें 70 सदस्यीय सदन की 20 सीटों पर चुनाव होगा। हालांकि दिल्ली सरकार पर किसी तरह का कोई खतरा नहीं है क्योंकि 70 सदस्यीय विधानसभा में उसके पास अभी भी 46 विधायक हैं। दिल्ली में बहुमत के लिए 36 सीटों की जरूरत होती है। उधर आम आदमी पार्टी का कहना है कि इस फैसले को वो दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।


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