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ये सबूत करते हैं इशारा कि मर्डर की रात आरुषि के कमरे में कोई और भी था...

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 14 , 2017 , 13:43 IST

डा. राजेश तलवार के फ्लैट में कत्ल की रात क्या पांचवा शख्स भी मौजूद था और क्या उसकी उपस्थिति को सीबीआई ने किसी खास वजह से नजरअंदाज किया। हाईकोर्ट ने इस बात से इंकार नहीं किया है कि मर्डर के दिन आरुषि के कमरे में हेमराज के अलावा कोई और भी था।

बेंच ने कहा, "इन्वेस्टिगेशन अथॉरिटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में दावा किया था कि हेमराज का फोन पंजाब में एक्टिव था। इस दावे को पुख्ता करने के लिए उन्होंने कोई सबूत नहीं रखा। ये फैक्ट कि हेमराज का फोन 16.5.2008 को एक्टिव था और किसी और शख्स के पास था, ये मजबूती से इशारा करता है कि तलवार के घर में उस रात कोई और भी घुसा था और वो मर्डर करने के बाद हेमराज का फोन भी ले गया। नहीं तो इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि जब हेमराज तलवार के घर L-32 की छत पर मृत पड़ा था, तब उसी घर के लैंडलाइन से की गई कॉल को हेमराज के फोन पर पिक किया गया।"

जस्टिस बीके नारायण और एके मिश्रा ने कहा, " अल्टरनेटिव हाइपोथीसिस (वैकल्पिक अवधारणा) के साफ और विश्वसनीय सबूत रिकॉर्ड में हैं, जो मजबूती से प्रॉसेक्यूशन की उस थ्योरी को नकारते हैं कि जुर्म केवल राजेश और नूपुर तलवार ने किया था।"

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को आरुषि के माता-पिता राजेश तलवार और नूपुर तलवार को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दोनों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए क्योंकि निचली अदालत का फैसला ठोस सबूतों पर नहीं बल्कि हालात से उपजे सबूतों के आधार पर था। इससे पहले 25 नवंबर 2013 को गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने हालात से जुड़े सबूतों के आधार पर दोनों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी, जिसके खिलाफ जनवरी 2014 में दोनों ने इलाहाबाद हाइकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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