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मराठा के बाद अब ब्राह्मण, राजपूत और मुस्लिमों ने की आरक्षण की मांग

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| नवंबर 30 , 2018 , 14:54 IST

आरक्षण मांगी की बातें महाराष्ट्र में मराठा और गुजरात में पाटीदोरों के बाद अब राजपूतों और ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने भी अतिरिक्त कोटे के लिए ओबीसी कमिशन से मांग की है। बता दें कि उधर महाराष्ट्र में मुस्लिम भी आरक्षण की मांग मुखर हो गई है। हालांकि महाराष्ट्र विधानमंडल में गुरुवार को मराठाओं को शिक्षा और नौकरी में 16 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव पास हो गया है। अब इस पर कानून बनाने की मुहर लग सकती है।

राजपूत समुदाय के नेताओं ने कहा कि वे कुल जनसंख्या का 8 फीसदी ही हैं और महाराष्ट्र में मराठाओं की तरह वह गुजरात में 8 फीसदी रिजर्वेशन की मांग करते हैं। समस्त गुजरात ब्रह्म समाज ने ओबीसी कमीशन को पत्र लिखकर उन्हें ओबीसी में शामिल करने के लिए एक सर्वे की मांग की है। गुजरात ब्रह्म समाज के मुखिया यग्नेश देव ने कहा कि गुजरात में ब्राह्मणों की संख्या 60 लाख है जो कि कुल जनसंख्या का 9.5 फीसदी है। उन्होंने कहा कि 42 लाख ब्राह्मण आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

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उन्होंने गुजरात सरकार से एक सर्वे कराने और ब्राह्मणों को आरक्षण देने की बात कही। राजपूत गरासिया समाज संगठन ने ओबीसी कमिशन के मुखिया सुगनाबेन भट्ट से मुलाकात करके एक लिखित दलील दी है। गांधीनगर जिले के राजपूत समाज के नेता राजन चावड़ा ने कहा कि राजपूर गरासदार को ओबीसी में शामिल करना चाहिए और ओबीसी कैटिगरी में अतिरिक्त कोटा देना चाहिए।

राजपूतों को कार्यक्षेत्र और शिक्षा में नहीं मिल रहे समान अवसर

उनका कहना है कि राजपूतों को वर्कप्लेस और शिक्षा क्षेत्र में समान अवसर नहीं मिल रहे हैं। वह मुख्य तौर पर खेती पर निर्भर हैं। दूसरे समुदायों से तुलना में उनके समुदाय में कमाऊ महिलाओं की संख्या कम है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में यह नहीं लिखा है कि सिर्फ 50 फीसदी आरक्षण ही दिया जाना चाहिए।

ओवैसी ने की मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग

वहीं एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग की है। उनका कहना है कि मुस्लिम भी रिजर्वेशन के हकदार हैं क्योंकि पीढ़ियों तक गरीबी में रहे हैं। ओवैसी ने गुरुवार को ट्विटर पर लिखा, 'सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा में पिछड़े मुसलमानों को वंचित रखना एक गंभीर अन्नाय है। मैं लगातार कहता आया हूं कि मुस्लिम समुदाय में ऐसी पिछड़ी जातियां हैं जो पीढ़ियों से गरीबी से रह रहे हैं। आरक्षण के जरिए इसे तोड़ा जा सकता है।'


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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