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धर्मसभा के बाद न कोई समझौता न कोई बात, सीधा राम मंदिर बनेगा: विहिप

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 24 , 2018 , 13:37 IST

अयोध्या में राम मंदिर निमार्ण की मांग एकाएक जोर पकड़ ली है। हिन्दू संगठन के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियों ने भी इसमें अपना हाथ लगा दिया है। अब एक बार फिर से राममंदिर निमार्ण मुराबाद समेत प्रदेश भर में शंखनाद रैली का ऐलान विहिप ने किया। विहिप ने कहा कि सांसद सदन में अध्यादेश लाएं। सांसद जबाव दें वह इससे बच नहीं सकते।

सांसदों को ज्ञापन दिया जाएगा और उनसे कहा जाएगा कि वह सदन में इसे रखें। विहिप का मकसद है कि आगामी संसद सत्र में अध्यादेश लाकर मंदिर का निर्माण करवाया जा सके। जिला स्तर पर प्रदेश भर में शंखनाद रैली होगी। मुरादाबाद के अगवानपुर स्थित किसान इंटर कालेज में शंखनाद रैली 25 को होगी। विहिप नेताओं ने इसका ऐलान कर दिया है। इस रैली में मुख्य वक्ता विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मंत्री गो रक्षा विभाग खेम चंद्र शर्मा होंगे।

रैली की तैयारियों का जायजा लेने आए मेरठ प्रांत के सह मंत्री यशपाल सिंह पहुंचे। संघ कार्यालय गांधी नगर में मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपना रुख स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर का निर्माण हो। उन्होने कहा कि राम मंदिर का निर्माण अब नहीं तो कब होगा। राम मंदिर को बनवाने के लिए विश्व हिन्दू परिषद ने शंखनाद रैली का आयोजन किया है।

बता दें रविवार को होने वाली धर्म सभा से पहले विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि हमारी अाखिरी बैठक होगी। इसके बाद और सभाएं या प्रदर्शन नहीं होंगे। न ही किसी को समझाया जाएगा। सीधे मंदिर निर्माण होगा। विहिप के संगठन सचिव भोलेंद्र ने कहा, ‘‘हमने पहले 1950 से 1985 तक 35 साल अदालती फैसले का इंतजार किया। इसके बाद 1985 से 2010 तक का समय हाईकोर्ट को फैसला देने में लग गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित सुनवाई की अर्जी दो मिनट में ठुकरा दी। दुर्भाग्य है कि 33 साल से रामलला टेंट में हैं। अब और इंतजार नहीं होगा।’’

बता दें इसी बीच, इस बीच, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शनिवार सुबह मुंबई से अयोध्या के लिए रवाना हो गए। उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भी 2 स्पेशल ट्रेनों से अयोध्या पहुंच रहे हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पहली बार इसे ना केवल खुला समर्थन दिया है, बल्कि प्रबंधन का जिम्मा भी संभाला है। राम मंदिर को लेकर 1992 के बाद एक बार फिर अयोध्या में हिंदू संगठनों का जमावड़ा हुआ है। सियासत गर्म है, लेकिन अयोध्या शांत नजर आती है। राम मंदिर विवाद से जुड़े लोग कहते हैं- हमें डर नहीं है। 1992 जैसा कुछ दिखाई नहीं देता।

प्रशासन ने क्या इंतजाम किए?

सुरक्षा को देखते हुए अयोध्या और आस-पास के जिलों की पुलिस बुलाई गई है। 70 हजार जवानों की तैनाती की गई है। पीएसी की 48 कंपनियां, आरएएफ की 5 कंपनियां भी अयोध्या में रहेंगी। एटीएस कमांडो भी तैनात किए गए हैं। पूरी अयोध्या पर ड्रोन कैमरों से नजर रखी जाएगी। खुफिया विभाग के अफसर और उनकी टीमें पहले से ही एक्शन में आ चुकी हैं।

शिवसेना, विहिप, संघ और हिंदू संगठनों का जमावड़ा क्यों?

वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार ऐसा नही है कि रामलला को अकेले छोड़ दिया गया या फिर उसके साथ कौन खड़ा है। बात यह भी है कि राजनीति पार्टियां अपनी किस्मत भी रामलला के नाम से ही आजमा रही है।शिवसेना के लिए राम मंदिर मुद्दा टेस्ट है। वह महाराष्ट्र से बाहर भी निकलना चाहती है। मंदिर मुद्दे पर शिवसेना ने बढ़त हासिल कर ली तो 2019 के चुनावों में भाजपा के सामने शर्तें रखने की स्थिति में होगी। बाल ठाकरे के निधन के बाद अब तक भाजपा ने शिवसेना के मुद्दे उठाए भी और बढ़त भी हासिल की।

जहां तक बात धर्म सभा की है, तो ये भाजपा के लिए परीक्षा की तरह है। भाजपा यह देखना चाह रही है कि मंदिर मुद्दे में कितना दम है। 2019 चुनाव में ये कितना असर डालेगा और 5 राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के नतीजे भी यह बता देंगे कि मंदिर मुद्दा और धर्म सभा का क्या असर रहा।


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