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गोधरा कांड में विशेष अदालत का फैसला, 2 दोषियों को उम्रकैद, 3 बरी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 27 , 2018 , 17:22 IST

साल 2002 में गोधरा कांड मामले में एसआईटी कोर्ट ने पांच आरोपियों में से दो लोगों को दोषी ठहराया है, जबकि तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। मामले में इमरान उर्फ शेरू भटुक और फारूक भाना को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है वहीं, हुस्सैन सुलेमान मोहन, फारूक धांतिया और कासम भमेड़ी को बरी कर दिया गया है।

गोधरा कांड मामले में विशेष अदालत ने दो आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि तीन को निर्दोष छोड़ दिया। साबरमती जेल की स्पेशल कोर्ट इस हत्याकांड मामले में मुख्य फैसला पहले ही सुना चुकी है, जिसमें 11 को मृत्युदंड व 20 को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।

गोधरा स्टेशन पर हुई इस वारदात के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। जिसमें 1,000 से भी ज़्यादा लोग मारे गए थे। इस मामले में सभी 94 आरोपी मुस्लिम थे। जिन पर हत्या तथा षड्यंत्र रचने के आरोप थे।

वर्ष 2011 में विशेष अदालत ने आगज़नी की वारदात का मास्टरमाइंड माने जाने वाले मौलवी उमरजी समेत 63 लोगों को बरी कर दिया था।

हाईकोर्ट ने भी उस फैसले में कोई बदलाव नहीं किया था और 31 लोगों को हत्या, हत्या की कोशिश तथा आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी करार दिया गया था। उनमें से 11 को फांसी तथा 20 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने फांसी की सज़ा पाए 11 दोषियों की सज़ा को भी उम्रकैद में तब्दील कर दिया।

अलग-अलग जगहों से हुई थी गिरफ्तारी-:

गौरतलब है कि मोहन को वर्ष 2015 में मध्य प्रदेश में झाबुआ से गिरफ्तार किया गया था जबकि भमेड़ी को दाहोद रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया, धंतिया और भाना को गोधरा स्थित उनके घरों से अरेस्ट किया गया। भटुक को महाराष्ट्र में मालेगांव से जुलाई 2016 में गिरफ्तार किया गया था।

कैसे हुआ था गोधरा कांड -:

27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में सवार होकर अयोध्या से लौट रहे 50 यात्री, जिसमें ज्यादातर कारसेवक थे, उन सभी की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद समूचा गुजरात हिंसा की लपटों में घिर गया था।

इन दंगों में तकरीबन एक हजार लोग मारे गए थे। यह पूरा मामला लोकल पुलिस स्टेशन से लेकर वर्ष 2008 में एसआईटी के हवाले कर दिया गया। हिंसा की घटना पर किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया बल्कि 94 लोगों पर मुकदमा चलाया गया। इसके बाद स्पेशल एसआईटी जज ज्योत्सना याग्निक ने 31 लोगों को दोषी ठहराते हुए 63 लोगों को बरी कर दिया। दोषियों में से 11 लोगों को मृत्यु दंड जबकि 20 को उम्र कैद की सजा दी गई।

पीड़ितों के परिजनों को 10 लाख के मुआवजे का एलान -:

पिछले वर्ष (2017) में गुजरात हाई कोर्ट ने 11 लोगों की सजा को घटाते हुए मृत्यु दंड से उम्र कैद कर दिया। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को इस बात के भी निर्देश दिए कि पीड़ितों के परिजन को 10 लाख रुपये बतौर मुआवजा दिया जाए।


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