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एअर इंडिया में 76% हिस्सा बेचेगी सरकार, ममता ने जताया विरोध

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 28 , 2018 , 19:44 IST

सरकारी विमानन कंपनी एअर इंडिया के विनिवेश के लिए केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि एअर इंडिया के विन‍िवेश के लिए बोली लगाई जाएगी। इसके लिए सरकार ने अर्नेस्ट एंड यंग को ट्रांजैक्शन एडवायजर के तौर पर नियुक्त किया है। सरकार एअर इंडिया में अपनी 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एअर इंडिया की नीलामी पर सब्स‍िडरी का 50 प्रतिशत AISAT और AIXL की हिस्सेदारी शामिल होगी। इसके साथ ही नीलामी में हिस्सा लेने वाले को 28 मई तक समय दिया जाएगा।

एअर इंडिया का रणनीतिक विनिवेश शीर्ष मैनेजमेंट के ट्रांसफर के जरिये किया जाएगा। इसके अलावा भारत सरकार के हिस्से के 76 फीसदी इक्व‍िटी शेयर बेचे जाएंगे।

इस ममाले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने आपत्ति जताई है। ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, 'मुझे मीडिया से जानकारी मिली कि सरकार एअर इंडिया में हिस्सेदारी में बेंच रही है। उन्होंने आगे कहा 'ये हमारे देश का गहने की तरह रहा है। हम इसकी कड़ी निंदा और विरोध करते हैं। इसके साथ ही हम इस फैसले को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग भी करते हैं। सरकार को हमारा देश बेचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। '

घाटे में चल रही एअर इंडिया और इसकी दो सब्सिडियरीज में हिस्सेदारी बेचने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रुचि पत्र (EoI) मंगाए हैं। मेमोरेंडम के मुताबिक, सरकार 76 फीसदी इक्विटी शेयर बेचने के साथ ही मैनेजमेंट कंट्रोल भी ट्रांसफर करना चाहती है।

केंद्र सरकार की योजना है कि राष्ट्रीय विमानन कंपनी एअर इंडिया की साल 2018 के अंत तक विनिवेश की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। नागर विमानन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा के मुताबिक, एअर इंडिया समूह को चार अलग-अलग संस्थाओं में विभाजित किया जाएगा और इस संबंध में 'सूचना ज्ञापन' जल्द ही जारी किया जाएगा।

बता दें कि केंद्र सरकार एअर इंडिया के विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी पहले ही दे चुकी है। उसके बाद से ही एअर इंडिया को बेचे जाने की कवायद चल रही थी।

इससे पहले इसी साल जनवरी में सरकारी विमानन कंपनी एअर इंडिया में एफडीआई को मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने एअर इंडिया को बेचने की योजना तैयार कर ली थी। प्रस्तावित मसौदे के तहत कंपनी को 4 भागों में बांटे जाने का प्रस्ताव रखा गया था।

जून 2017 में ही केंद्र सरकार ने एअर इंडिया के विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। कैबिनेट की बैठक में सरकार ने इसमें अपनी हिस्सेदारी को बेचने का फैसला लिया था। इससे पहले, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने केंद्र से इसके विनिवेश को मंजूरी देने की सिफारिश की थी।

एअर इंडिया को कोर एयरलाइंस बिजनेस, रीजनल आर्म, ग्राउंड हैंडलिंग और इंजीनियरिंग ऑपरेशंस में बांटा जाएगा। बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया इस साल अंत तक पूरी कर ली जाएगी।

कैसे होगी एअर इंडिया की बिक्री-

पहले चरण में मूल एअर इंडिया के साथ इसके पूर्ण स्वामित्व वाली एअर इंडिया चार्टर और किफायती सर्विस कैरियर एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी इकाइयों को बिक्री के लिए पेश किया जाएगा। जबकि बाद के चरणों में एयर इंडिया ट्रांसपोर्ट सर्विसेज, होटल कॉरपोरेशन तथा एयर इंडिया एलाइड सर्विसेज का नंबर आएगा। प्रत्येक के लिए अलग से एक्सप्रेशन आफ इंट्रेस्ट बिड आमंत्रित की जाएंगी। इस विधि से सरकार को बेहतर रकम प्राप्त होने की संभावना है। विमानन क्षेत्र से जुड़े वित्तीय सलाहकारों के अनुसार सरकार को एअर इंडिया के विनिवेश से 70 हजार करोड़ रुपये तक की रकम प्राप्त हो सकती है। एअर इंडिया पर 50 हजार करोड़ रुपए के भारी कर्ज को देखते हुए इस रकम को कम नहीं माना जा रहा।


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