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एयरफोर्स की पोस्टर गर्ल को घर से बेदखल करने की कोशिश क्यों?

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 9 , 2017 , 15:39 IST

भारतीय वायुसेना की पोस्टर गर्ल पूजा ठाकुर को उनके दक्षिणी दिल्ली के सरकारी आवास से बाहर करने की कोशिश हुई। पूरा मामला आपको बता दें उससे पहले आपके लिए ये जानना जरूरी है कि पूजा ठाकुर हैं कौन? 

बराक ओबामा को दिया था गार्ड ऑफ ऑनर 

एयरफोर्स की विंग कमांडर पूजा ठाकुर ने साल 2015 में बराक ओबामा के भारत दौरे के वक्त राष्ट्रपति भवन में अमेरिकी राष्ट्रपति को दिए गार्ड ऑफ ऑनर की अगुवाई की थी। फिट और तेजस्वी पूजा ठाकुर की तस्वीरें उस वक्त खूब वायरल हुईं थी और उनकी भूमिका को नारी शक्ति के उभरते रूप के तौर पर देखा और सराहा गया था। 

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हाल ही में एयरफोर्स विंग कमांडर पूजा ठाकुर से उनका सरकारी आवास खाली करने के लिए उन्हें नोटिस दिया गया, बता दें पूजा ठाकुर एयरफोर्स में शार्ट सर्विस कमीशन के ज़रिए भर्ती हुईं थी और वो फिलहाल वायुसेना में स्थायी कमीशन के लिेए एयरफोर्स ट्रिब्यूनल में कानूनी जंग लड़ रही हैं। पिछले सोमवार उन्हें दक्षिणी दिल्ली का सरकारी आवास खाली करने के लिए नोटिस थमाया गया था लेकिन पूजा ठाकुर सीधे एयरफोर्स ट्रिब्यूनल पहुंची और मकान न खाली करवाने की अपील की। एयरफोर्स ट्रिब्यूनल ने स्थायी कमीशन के पूजा ठाकुर के केस के जारी रहने तक उन्हें सरकारी आवास में रहने की इजाजत दे दी है। 

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क्या है पूरा मामला ?

दरअसल सिंतबर 2016 में पूजा ठाकुर को उनके बाकी पुरूष साथियों की तरह एयरफोर्स में स्थायी कमीशन नहीं मिला, सिंतबर 2016 के बाद ही उन्हें पहली बार सरकारी घर खाली के लिए नोटिस आया । जुलाई 2016 में पूजा ठाकुर ने एयरफोर्स ट्रिब्यूनल में स्थायी कमीशन के लिए केस फाइल किया, ट्रिब्यूनल को की गई अपील में पूजा ठाकुर ने एक महिला के तौर पर उन्हें स्थायी कमीशन न दिए जाने को पक्षपात पूर्ण कार्यवाही बताया है। अगर पूजा ठाकुर को एयरफोर्स में स्थायी कमीशन मिल जाता है तो वो भी पुरूष अधिकारियों की तरह लेफ्टिनेंट जनरल की रैंक तक प्रमोशन पाने की हक़दार हो जाएंगी साथ ही 60 साल की उम्र तक एयरफोर्स में नौकरी भी कर सकेंगी।

एयरफोर्स के वकील पहले ही ट्रिब्यूनल में कह चुके हैं कि पूजा ठाकुर को स्थायी कमीशन नहीं दिया जा सकता क्योंकि 2006 में उनकी नियुक्ति के समय उन्हें शार्ट सर्विस कमीशन ऑफिसर के तौर पर नौकरी दी गई थी। बता दें भारतीय सेना के तीनों अंगो में महिलाओं को पुरूष अधिकारियों के बराबर का दर्ज़ा दिए जाने को लेकर अक्सर बहस छिड़ी रहती है। 


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