अमेरिका में फेंककर हिंदुस्तान में फंस गए शिवराज

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| अक्टूबर 25 , 2017 , 20:19 IST

फेंकना मानव स्वभाव है। हर आदमी फेंकता है। कोई थोड़ा फेंकता है। कोई ज्यादा फेंकता है। कोई दिन -रात फेंकता रहता है। कोई हांकते-फेंकते जिंदगी गुजार देता है। जब से सोशल मीडिया का दौर आया है तब से फेंकने और हांकने वालों की मुसीबत आ गई है। इधर फेंका नहीं, उधर से लपेटकर कोई उल्टा चिपका जाता है। चचा ले लो। अभी-अभी फेंका था न आपने। लो देखो। नेताओं के साथ ऐसा अक्सर होता है। हांकने-फेंकने की फितरत से मजबूर नेता बोलने से पहले सोचते नहीं कि सात समंदर पार भी बोलेंगे तो उनके बोले-कहे की असलियत में सबूत कोई निकालकर मिनटों में सोशल मीडिया पर चिपका देगा। अपना फेंका हुआ जब तक समेटेंगे, तब तक काफी रायता फैल चुका होगा। फिर न तो उनका प्रचार विभाग लीपापोती कर पाएगा, न ही वो कलटी-पलटी मार पाएंगे। अभी -अभी मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ यही हुआ है।

अपने सूबे के साहेब बहादुर शिवराज सिंह ट्रंप के मुल्क गए हैं। गए तो हैं इनवेस्टमेंट और दुनिया भर की मीटिंग-सिंटिंग के लिए। बीच आ गई है हसीन सड़क की दास्तान। हुआ यूं कि शिवराज सिंह ने अमेरिका पहुंचकर भारतीय न्यूज एजेंसी एएनआई को एक बयान दिया। कहा कि वाशिंगटन डीसी एयरपोर्ट से बाहर निकलकर सड़क मार्ग से चलने पर उन्हें ये अहसास हुआ कि इससे बेहतर सड़क तो मध्यप्रदेश की है। उधर शिवराज सिंह चौहान ने बोला, इधर एएनआई ने उनका बयान रिलीज कर दिया। बस फिर क्या था। कुछ ही मिनटों में ट्विटर पर उनकी धुलाई और फजीहत होने लगी।

उनके ही सूबे के अलग -अलग जिलों से उनके ही मतदाता सड़कों की तस्वीरें पोस्ट करने लगे। जिसे देखो वही शिवराज सिंह से चुटकी लेते हुए बदहाल सड़कों की तस्वीरों से सोशल मीडिया को भरने लगा। साहब उधर अपने अधिकारियों के साथ देशाटन और मीटिंग में मशरूफ थे। इधर लोग उन्हें आईना दिखाने में जुटे थे। सतना, ग्वालियर, इंदौर, रीवा, उज्जैन, हरदा, खजुराहो समेत दर्जनों शहरों -कस्बों से जुड़े स्टेट हाइवे और नेशनल हाइवे की तस्वीरें शिवराज सिंह चौहान को मुंह चिढा़ने के लिए उनके टाइमलाइन पर चिपका दी गई।

शिवराज सिंह ने भी नहीं सोचा होगा कि बातों बातों में थोड़ा फेंक देंगे, वो भी अपने मुल्क से हजारो किमी दूर अमेरिका तो क्या फर्क पड़ेगा… कौन जानेगा.. कौन पूछेगा.. यहीं चूक गए शिवराज.. यहां तो पूछने वाले कैमरा, कंप्यूटर और स्मार्टफोन लेकर बैठे थे। दे दनादन.. दे दनादन… तस्वीरें चिपकाकर पोल खोलने में लग गए सब। गुस्सा यही था कि चचा, इतना क्यों फेंकते हो। फेंको लेकिन इतना नहीं कि कोई लपेट न सके।

ये तो हुई हंसी -मजाक की बात। अब जरा अजब एमपी की गजब सड़कों की हकीकत जान लीजिए। गूगल पर सर्च के दौरान खोजी गई कुछ खबरों से पता चला कि सड़कों के घटिया निर्माण के मामले में मध्यप्रदेश अव्वल राज्यों में एक है। बीते साल पीएम मोदी की तरफ से सड़कों का हाल जानने के लिए ‘मेरी सड़क’ के नाम से एक एप लांच किया गया था। मकसद था ये जानना कि देश में सड़कों का हाल क्या है और लोगों की शिकायतें क्या है। जब इस एप पर शिकायतें आने लगी तो पता चला कि सबसे अधिक शिकायतें जहां से आ रही है, उनमें एमपी सबसे ऊपर वाले राज्यों में है। एप के जरिए मिली शिकायतों पर शिवराज सरकार से जवाब भी मांगा गया था।

लोकसभा में ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से सड़कों की खास्ता हालत पर दिए गए जवाब में बीस जुलाई 2015 से नवंबर 2016 तक एमपी में 2182 शिकायतें दर्ज हुई हैं। ये शिकायतें सड़कों की गुणवत्ता, टूट -फूट, घटिया निर्माण और मेंटेनेंस न होने को लेकर है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कों के निर्माण में भी एमपी काफी पीछे है। 2016-2017 के लिए 6200 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 2628 किमी का ही काम हो पाया है। एमपी में सड़कों का हाल जानने के लिए हमने गूगल पर सर्च किया तो एक वेबसाइट मिली - Badroadsinindia.com इस वेबसाइट पर राहगीरों ने एमपी के सड़कों का हाल दर्ज कराया है।

सवाल ये नहीं कि एमपी की सड़कें इतनी बुरी क्यों हैं..ये हाल कई राज्यों की सड़कों का है। बिहार का पहले बहुत बुरा हाल था। अब थोड़ा सुधरा जरुर है लेकिन यूपी, हरियाणा और राजस्थान के मुकाबले बहुत खराब है। हो सकता है कि एमपी की सड़कें भी बिहार से अच्छी हो..मुद्दा ये है ही नहीं। मुद्दा तो हांकने-फेंकने का है। कहां ये मुंह और मसूर की दाल वाली बात है। अमेरिका जाकर कोई सीएम ये कह दे कि वाशिंगटन डीसी से अच्छी सड़कें तो हमारे सूबे की है तो उनका मजाक उड़ना लाजिमी है। तो शिवराज जी, अगली बार से याद रहे। उतना ही फेंकिए, जितना सबको हजम हो जाए।