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Review: हॉकी से आगे देश के तमाम मुद्दों को उठाती है अक्षय की 'गोल्ड'

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 15 , 2018 , 14:24 IST

अक्षय कुमार की फिल्म ‘गोल्ड’ सिनेमा घरों पर आ गई है। अगर आप भी फिल्म देखने के इच्छुक हैं तो उससे पहले जान लीजिए फिल्म का रिव्यू और कहानी।

‘गोल्ड’ लंदन ओलंपिक 1948 में भारत की जीत से प्रेरित कहानी है। ये जीत भारत के आजाद होने के एक साल बाद मिली थी। यह फतह खास इसलिए थी क्योंकि पहली बार इंडिया ब्रिटिश इंडिया का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही थी। प्लेयर्स दुनिया के सामने ये साबित करके गर्व महसूस कर रहे थे कि वे एक आजाद देश के रूप में भी खेल कर जीत सकते हैं। इस फिल्म में आपको अक्षय का बंगाली लुक नजर आएगा। म्यूजिक में भी जैज का तड़का लगाया गया है। फिल्म जिस दौर की है उस दौर में जैज म्यूजिक काफी चलन में था। फिल्म में मौनी रॉय अक्षय की पत्नी मोनोबिना दास के रोल में हैं। मौनी कई टीवी सीरियल में नजर आ चुकी हैं।

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देशभक्ति के मामले में अक्षय हमेशा आगे

अक्षय कुमार ने देशभक्ति के मामले में हमेशा अपने आप को एक अलग पहचान दी है और इस बार भी वो अपनी देशभक्ति को साबित करते हुए लीक से हटकर कुछ अलग करने में सफल रहे हैं। फिल्म गोल्ड की डायरेक्टर रीमा कागती लीक से हटकर सिनेमा बनाने में माहिर हैं। इससे पहले उन्होंने आमिर खान के साथ फिल्म तलाश बनाई थी और अब अक्षय कुमार के साथ मिलकर हॉकी के पहले गोल्ड जीतने पर आधारित फिल्म बनाई है। फिल्म देशभक्ति के जज्बे से भरी हुई है। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ-साथ कई एक्टरों ने कमाल का अभिनय किया है।

30 मिनट की शुरूआती फिल्म में किरदारों का परिचय

फिल्म में अक्षय कुमार की ब्रैंडेड कॉमेडी से लेकर इमोशनल गानों तक को इस फिल्म में जिस तरह से पिरोया गया है वो अखरता नहीं है। गोल्ड के पहले 30 मिनट इस साल की सभी फिल्मों में सबसे बेहतर स्क्रीनप्ले को दिखाते हैं। आप सभी किरदारों से मिल लेते हैं, उनकी परेशानियों को समझ लेते हैं और इसके लिए एक बार भी कोई ज़रुरत से ज्यादा नाटकीय चित्रण नहीं किया जाता।

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फिल्म में हॉकी से आगे हैं कई मुद्दे

इस फिल्म में हॉकी के अलावा क्षेत्रवाद, जातिवाद और टीम में अपनी जगह को लेकर खिलाड़ियों के बीच भेदभाव को बहुत ध्यान से उकेरा गया है। रीमा कागती अपनी टीम के खिलाड़ियों की ज़िंदगी के माध्यम से बहुत सारे ऐसे मुद्दों को उठाती हैं जो हॉकी से आगे हैं। कह सकते हैं कि बहुत समय बाद एक ऐसी फिल्म देखने को मिलेगी जिसमें देशभक्ति है लेकिन पाकिस्तान नहीं, हैरान भी करती है और अच्छा भी लगता है।

पुराने समय को दिखाने के लिए ग्रैफिक्स का कमाल

153 मिनट की इस फिल्म में पुराना समय दिखाने के लिए ग्राफिक्स का इस्तेमाल हुआ है और वो इतने अच्छे नहीं हैं लेकिन कलाकारों की एक्टिंग इस तरफ आपका ध्यान जाने नहीं देंगी। अक्षय इस फिल्म में अपने टॉप पर हैं और इस स्वतंत्रता दिवस पर आप ये फिल्म देख सकते हैं।

यहां देखिए फिल्म का ट्रेलर


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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