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CBI निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा, जाने इसके पीछे की वजह

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 11 , 2019 , 09:03 IST

सलेक्ट कमैटी की बैठक में CBI निदेशक आलोक वर्मा पर बड़ा फैसला लेते हुए उन्हे CBI निदेशक के पद से हटा दिया गया। उच्चस्तरीय समिति ने आलोक वर्मा को 2-1 के बहुमत से बर्खास्त कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।  इस समिती में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस एके सीकरी शामिल थे।

CVC ने आलोक वर्मा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं और साथ ही सीबीआई के रिकॉर्ड निकालकर आलोक वर्मा के खिलाफ फौरन जांच करने की भी बात कही है। CVC ने अपनी रिपोर्ट में आलोक वर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होने मोइन कुरैशी और अन्य के मामले की जांच बंद करने के लिए सतीश बाबू साना से 2 करोड़ रुपये की घूस ली। इसके अलावा CVC ने बताया कि आलोक वर्मा ने CBI की जांच से IRCTC मामले के मुख्य आरोपी राकेश सक्सेना को बचाने की कोशिश की। इसके साथ ही उन्होने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के ठिकानों पर तलाशी अभियान नहीं लेने का निर्देश भी जारी किया था। CVC ने मामलों को गंभीर मानते हुए आलोक वर्मा को तीन बार नोटिस भेजा और दस्तावेजों को पेश करने को कहा था। आईए जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय सिलेक्शन कमिटी ने आखिरकार CBI चीफ आलोक वर्मा को क्यों हटाया:

अधिकारियों ने बताया है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट में RAW द्वारा पकड़ी गई टेलिफोन बातचीत के आधार पर ही आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार और ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगाया था। इसके चलते ही जांच एजेंसी के 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी CBI चीफ को हटाने का फैसला लिया गया।

आलोक वर्मा पर मोइन कुरैशी केस में सतीश बाबू साना से 2 करोड़ रुपये घूस लेने का आरोप था। इसके साथ हीं आलोक वर्मा पर IRCTC घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव के परिसर में तलाशी नहीं लेने का निर्देश जारी करने का आरोप है।

इसके अलावा एक अन्य मामला सीबीआई द्वारा गुरुग्राम में भूमि अधिग्रहण के बारे में दर्ज शुरुआती जांच से संबंधित है। CVC ने आरोप लगाया है कि वर्मा का नाम इस केस में शामिल है और कम से कम 36 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। आयोग ने मामले की सघन जांच का सुझाव दिया था। सीवीसी ने आरोप लगाया था कि वर्मा ने IRCTC केस में एक अधिकारी को बचाने की कोशिश की, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद शामिल थे। आयोग ने यह भी आरोप लगाया कि वर्मा दागी अधिकारियों को सीबीआई में लाने की कोशिश कर रहे थे।

 


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