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UN में मिली हमें कामयाबी: चीन की योजना के खिलाफ अमेरिका व जापान भारत के साथ

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 19 , 2017 , 09:19 IST

संयुक्त राष्ट्र आम सभा की सालाना बैठक शुरू हो गई है। इस साल की बैठक अपने आप में ख़ास है. खास इसलिए कि बदलते माहौल में दुनियाभर में नए ब्लॉक तैयार हो रहे हैं। उत्तर कोरिया के लगातार हमलावर रुख के बीच अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने भी एकजुट होना शुरू कर दिया है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण पर सबकी नज़र रहेगी, जिसमें वह सीरिया, अफ़गानिस्तान, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रणनीति पर बात कर सकते हैं। यूएन में उनके पेरिस पर्यावरण समझौते पर भी अमेरिका का पक्ष रखने की खबर है।

भारत को मिली बड़ी कामयाबी, US और जापान ने दिया साथ

बेल्ट रोड इनिसिएटिव (बीआरआई) के तहत गुलाम कश्मीर में चीन की कनेक्टिविटी परियोजना का विरोध कर रहे भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है। अमेरिका और जापान दोनों ने इस मुद्दे पर भारत के पक्ष का समर्थन किया है। सोमवार को न्यूयार्क में तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक मे चीन का नाम लिये बगैर कनेक्टिविटी (ढ़ांचागत) परियोजनाओं में दूसरे देशों की सार्वभौमिकता का आदर करने की बात कही गई है। डोकलाम विवाद के बाद यह दूसरा मौका है जब जापान और अमेरिका एक ऐसे मुद्दे पर भारत के साथ खड़े हुए हैं जो चीन के साथ जुड़ा हुआ है।

20 देशों के राजनयिकों से मुलाकात करेंगी सुषमा

इधर, भारत के लिए भी यह बैठक खास है। हाल के दिनों में चीन और पाकिस्तान से तनातनी के बीच विदेशमंत्री सुषमा स्वराज भी भारत के पक्ष को यूएन में मजबूती से उठाने में जुटी हुई हैं। सुषमा की मुलाक़ात अमेरिकी और जापानी विदेश मंत्री से हो चुकी है। इस मुलाकात को चीन के खिलाफ भारत-अमेरिका और जापान की तैयारियों के तौर पर भी देखा जा रहा है। सुषमा इस दौरे में 20 देशों के राजनयिकों से मुलाक़ात करेंगी। इसके अलावा सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता के दावे को सुषमा मज़बूती देने में जुटी हैं।

रोहिंग्या को ले आंग-सान-सू -की भाषण पर रहेगा नजर

संयुक्त राष्ट्र संघ की इस बैठक में म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सु की के भाषण पर सबकी नज़र रहेगी। माना जा रहा है कि वो रोहिंग्या के मुद्द पर यूएन में अपनी सरकार का पक्ष रखेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने बैठक से पहले कहा कि सु की के पास हिंसा रोकने का ये आखिरी मौका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों की घर वापसी म्यांमार सरकार की जिम्मेदारी है।

UN में दिखा भारत-अमेरिका और जापान का नया त्रिगुट

तीनों देशों ने कनेक्टिविटी के मुद्दे पर दूसरे देशों की भौगोलिक संप्रभुता का ख्याल रखने का आह्वान किय़ा है। और इसी आधार पर गुलाम कश्मीर में चीन की बीआरआइ परियोजना का विरोध करता है भारत। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और जापान के विदेश मंत्री टारो कोनो के साथ त्रिपक्षीय बैठक के बाद जारी बयान इस बात को बताता है कि उक्त तीनों देशों के बीच एक नया त्रिगुट तेजी से उभर रहा है।

वैसे इन तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की पहले भी बैठकें होती रही हैं लेकिन इस बार खास बात यह है कि चीन और उत्तर कोरिया इनके साझा एंजेडे में सबसे ऊपर है। तीनों विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एक बेहद संक्षिप्त विज्ञप्ति जारी की गई है लेकिन इनके तेवर को साफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।
उक्त तीनों देशों ने दिखाने की कोशिश की है कि वे किसी भी देश की विस्तारवादी नीतियों या उत्तर कोरिया के तानाशाह के खतरनाक मंसूबों के खिलाफ एक साथ खड़े हैं।


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