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NASA को मिली बड़ी कामयाबी, मंगल पर उतरा InSight लैंडर यान

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 27 , 2018 , 08:53 IST

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के एक बड़ी कामयाबी मिली है। नासा का मार्स इनसाइट लैंडर यान सफलतापूर्वक मंगल की सतह पर उतारा गया। भारतीय समयानुसार सोमवार- मंगलवार की रात करीब 1:24 बजे इसे मंगल पर लैंड कराया गया। इनसाइट लैंडर यान को मंगल की रहस्यमयी दुनिया के बारे में जानकारी के लिए बनाया गया।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मंगल ग्रह के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में मददगार होगा। इससे पृथ्वी से जुड़े नए तथ्य पता लगने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

दुनियाभर की तमाम अंतरिक्ष एजेंसीज मंगल पर पहुंचने के 43 प्रयास कर चुकी हैं और ज्यादातर प्रयास नाकाम रहे हैं। अगर इनसाइट लेंडर सही तरीके से मंगल पर पहुंच सका और अपने प्रयोग कर पाया तो वर्ष 2030 तक मानव का लाल ग्रह पर पहुंचना काफी हद तक संभव हो सकेगा।

इनसाइट की स्पीड 19800 km/h

नासा के साइंस मिशन डायरेक्टरेट के एसोसिएट प्रशासक थामस जरबुचन का कहना हैं कि मंगल को हम हल्के में नहीं ले सकते, वहां पहुंचना वाकई मुश्किल है। इनसाइट की स्पीड 19,800 किलोमीटर प्रतिघंटा की थी। जब ये मंगल के वातावरण में पहुंचा तो घर्षण से काफी गरमी उत्पन्न होगी, जो 2700 फॉरेनहाइड यानि 1500 सेल्सियश तक हो सकती है।

बेहद खतरनाक थे वो सात मिनट

मंगल पर यान के उतरने के पहले सात मिनट सबसे ज्यादा खतरनाक थे। ये वह समय था जब इनसाइट मंगल के सघन वातावरण में हाइपरसोनिक स्पीड से प्रवेश कर रहा था और उसे अपनी गति घटाते हुए बैलगाड़ी की गति पर आना था। और फिर धीरे से मंगल की जमीन को छुआ।

मार्स इनसाइट कैसे काम करेगा

नासा का यह यान सिस्मोमीटर की मदद से मंगल की आंतरिक परिस्थितियों का अध्ययन करेगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि मंगल ग्रह पृथ्वी से इतना अलग क्यों है।

इनसाइट लैंडर की क्या है खासियत ?

1. इनसाइट का पूरा नाम ‘इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस' है।

2. मार्स इनसाइट लैंडर का वजन 358 किलो है।

सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाला यान है।

3. 26 महीने तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

4. कुल 7000 करोड़ का मिशन है।

5. इस मिशन में यूएस, जर्मनी, फ्रांस और यूरोप समेत 10 से ज्यादा देशों के वैज्ञानिक शामिल हैं।

6. इसका मुख्य उपकरण सिस्मोमीटर (भूकंपमापी) है, जिसे फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी ने बनाया है। लैंडिंग के बाद ‘रोबोटिक आर्म’ सतह पर सेस्मोमीटर लगाएगा।

7. दूसरा मुख्य टूल ‘सेल्फ हैमरिंग’ है, जो ग्रह की सतह में ऊष्मा के प्रवाह को दर्ज करेगा।

8. इनसाइट की मंगल के वातावरण में प्रवेश के दौरान अनुमानित गति 12 हजार 300 मील प्रति घंटा रही।


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