राजनीति

उपचुनाव में मिली शिकस्त के बाद दिल्ली में योगी और शाह करेंगे हार की समीक्षा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 17 , 2018 , 11:53 IST

उत्तर प्रदेश और बिहार उपचुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी खासी चिंतित नजर आ रही है। खासकर जब मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री अपनी सीटों को न बचा पाएं हो यह बात भाजपा के आलाकमान तक को सोचने पर मजबुर कर दिया है, हालांकि अपनी परंपरागत गोरखपुर सीट पर हार के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके पीछे अति-आत्मविश्वास को वजह बता रहे हैं।

पार्टी हाई-कमान ने उन्हें दिल्ली तलब किया है। सूत्रों से खबर है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ को दिल्ली बुलाया है। शनिवार 17 मार्च की शाम 5 बजे अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच यह बैठक होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने हार के बाद 14 मार्च को अपने कुछ कार्यक्रम और 15 मार्च को होने वाले अपने सारे राजनीतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए थे। बता दें कि पूर्व में तय कार्यक्रम के मुताबिक योगी आदित्यनाथ को गोंडा जाना था। वहां पर योगी को 4 दिवसीय लोक कला महोत्सव में हिस्सा लेना था लेकिन अब उनकी जगह उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा महोत्सव में हिस्सा लेंगे।

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गोरखपुर-फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे 14 मार्च को घोषित किए गए। गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ और फूलपुर से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या 2014 में सांसद बने थे। लेकिन सीएम और डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी मिलने के बाद ये सीट खाली हो गई थी, जिसके बाद यहां 11 मार्च को वोटिंग कराई गई थी।

बता दें कि अब तक पूर्वांचल की गोरखपुर सीट को बीजेपी का सबसे मजबूत दुर्ग माना जाता रहा है, लेकिन उपचुनाव में ये सुरक्षित किला दरक गया। पिछले 30 साल से बीजेपी के लिए अजेय रहे गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बसपा के समर्थन से सपा ने जीत का परचम लहरा दिया है।

बीजेपी उम्मीदवार को गोरखपुर संसदीय सीट से सिर्फ नहीं हार ही नहीं मिली बल्कि जिस गोरखनाथ मठ के योगी आदित्यनाथ महंत हैं, उस पर भी 2014 लोकसभा चुनाव से कम वोट मिले हैं। गोरखनाथ मठ वाले बूथ (बूथ संख्या 250) पर बीजेपी उम्मीदवार उपेंद्र शुक्ल को महज 182 वोट मिले. जबकि 2014 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ को 233 वोट मिला था।

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हालांकि योगी और गोरखपुर की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र गोरखनाथ मठ पिछले तीन दशक से है। वहीं हार पर योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि हम इस (बसपा-सपा) गठबंधन को समझने में फेल रहे, जिसका एक कारण अतिआत्मविश्वास भी है। दोनों चुनाव हमारे लिए एक सबक है, इसकी समीक्षा की काफी जरूरत है।


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