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गांधी के ग्राम स्वराज से निकाला करोड़ों रोजगार का फॉर्मूला, प्रदीप गुप्ता की किताब का शाह ने किया विमोचन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 3
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| अगस्त 11 , 2018 , 19:14 IST

प्रदीप गुप्ता की किताब ''Blue Print For An Economic Miracle'' का विमोचन BJP अध्यक्ष अमित शाह ने किया...

महान संत विवेकानंद ने कहा था कि शिखर छूना है तो शून्य से शुरुआत करो। देश की भीषण बेरोजगारी और आम आदमी की रोजी-रोटी संबंधी बढ़ती परेशानियों को दूर करने के लिए जाने-माने मीडिया व्यवसायी प्रदीप गुप्ता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज से प्रेरित होकर एक फॉर्मूला लेकर आए हैं, जिसका उनकी पुस्तक ''ब्ल्यू प्रिंट फॉर ऐन इकॉनॉमिक मिराकल'' में विस्तार से जिक्र है। इस पुस्तक का विमोचन शुक्रवार देर शाम नई दिल्ली कंस्टीट्यूशन क्लब में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व मेनका गांधी ने किया।

इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि प्रदीप गुप्ता की पुस्तक के विमोचन का प्रस्ताव जब उनके पास आया तब वे सोच-विचार में पड़ गए क्योंकि यह उनके जीवन की बड़ी परीक्षाओं में से एक थी। काफी अध्ययन और शोध के बाद उन्होंने इस पुस्तक के विमोचन का फैसला किया क्योंकि पुस्तक में दिया फॉर्मूला विचार करने योग्य है जिससे भारत के युवाओं को एक दिशा दी जा सके।

पुस्तक विमोचन से पहले प्रदीप गुप्ता ने ''ब्ल्यू प्रिंट फॉर ऐन इकॉनॉमिक मिरकल'' के बारे में आमजन की भाषा में बताया कि वे कोई अर्थशास्त्री नहीं हैं लेकिन उन्हें खर्च-आमदनी का समीकरण आता है। गुप्ता ने कहा कि शोध उनका व्यवसाय है इसलिए तमाम शोध-विश्लेषण के बाद उन्होंने इस पुस्तक की रचना की है, जो भारत में बेरोजगारी की समस्या के समाधान का सर्वश्रेष्ठ मार्ग बन सकता है क्योंकि इस विषय की आत्मा महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज है।

पुस्तक अपने नाम के अनुरूप चमत्कारी है और भूमिका से ही इसका अलग स्वरूप दिखाई देने लगता है। मध्य प्रदेश के बारासिवनी स्थित तेहली बाई हायर सेकंडरी स्कूल से हार्वर्ड बिजनेस स्कूल का सफर तय करने वाले ऐक्सिस माई इंडिया के चेयरमैन-सह-प्रबंध निदेशक प्रदीप गुप्ता शोध की ऊंचाइयां इसलिए छू पाए क्योंकि उनकी शुरुआत शून्य से हुई है। एक साधारण कस्बे से मुंबई जैसे महानगर का सफर वाकई उन्हें अनेक अनुभव दे गया होगा, जिस आधार पर वह करोड़ों लोगों को रोजगार देने का फॉर्मूला खोज पाए। उन्होंने अपने संबोधन में जिक्र किया कि वह यह फॉर्मूला इस सरकार में इसलिए लेकर आए हैं क्योंकि इस सरकार में निर्णय लेने की गति तेज है। आज चूंकि देश के 75 प्रतिशत भूभाग पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का शासन है इसलिए केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर उनके फॉर्मूले के क्रियान्वय की बेहतर संभावनाएं नजर आती हैं।

पुस्तक के मुताबिक भारत में वे सारी संभावनाएं मौजूद हैं, जिनके बल पर वह पूरे विश्व का अन्नदाता बन सकता है। पूरी दुनिया में भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहां की सबसे अधिक भूमि उपजाऊ है। पुस्तक में सुझाव दिया गया है कि उद्योग, सेवा क्षेत्र के साथ-साथ कृषि क्षेत्र का भी उसी अनुपात में आधुनिक दृष्टि के साथ विकास हो तो निश्चित रूप से भारत सुपर पावर बन जाएगा। भारत में पर्याप्त खेती योग्य जमीन है, खेती करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन हैं क्योंकि देश की 70 प्रतिशत आबादी अभी भी गांवों में रह रही है और उसका मुख्य व्यवसाय कृषि ही है और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण बिंदु मौसम जो देशवासियों को 365 दिन खेतों में काम करने का अवसर प्रदान करता है। भारत को छोड़कर एक साथ ऐसी तीनों विशेषताएं किसी भी देश को प्राप्त नहीं है। अगर जमीन, आबादी और मौसम के समन्वय से खेती के क्षेत्र में यथोचित दोहन किया जाए तो पूरी दुनिया भारत के अनाज पर जिंदा रहने लगेगी और भारतीयों की आमदनी खर्च से दोगुना हो जाएगी। और यह सब महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज से प्रेरित है, विवेकानंद के उस विचार से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत एक दिन विश्व का लीडर बन जाएगा।

पुस्तक में बताया गया है कि जिस तरह सरकार उद्योगों और बुनियादी ढांचा के लिए जमीन उपलब्ध कराती है, उसी तरह आधुनिक खेती के लिए व्यक्ति और संस्थाओं को जमीन उपलब्ध कराए। इसमें शिक्षा के माध्यम से मूल्य पैदा किया जाए और ग्रामीणों में रूझान विकसित किया जाए तो ग्रामीणों को उनके ही गांव में रोजगार मिल सकेगा और वे अपने समाज में रहते हुए ही राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सकेंगे। उद्योगों की तर्ज पर कृषि के विकास का यह फॉर्मूला निसंदेह कारगर है क्योंकि आम ग्रामीणों के पास जमीन तो है लेकिन निवेश के लिए पैसा नहीं है। अगर उन्हें व्यक्ति या संस्था के रूप में निवेशक मिल जाए अथवा सरकार गांवों में उद्यमियों को खेती के लिए जमीन उपलब्ध कराए ताकि वे भारी-भरकम निवेश कर लाभकारी खेती कर सकें तो निश्चित रूप से स्थानीय लोगों को रोजगार की कमी नहीं रहेगी।


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