नेशनल

अमित शाह ने लॉ कमीशन को लिखी चिट्ठी, 'एक देश-एक चुनाव' का किया समर्थन

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
1972
| अगस्त 13 , 2018 , 15:18 IST

'वन नेशन, वन इलेक्शन' के मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में काफी समय से चर्चा चल रही है। लॉ कमीशन ने इस मुद्दे सभी पार्टियों से चर्चा भी की है। इसी मुद्दे पर सोमवार को बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल आज लॉ कमीशन पहुंचे। बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव की अगुवाई में बीजेपी के नेता लॉ कमीशन के चेयरमैन जस्टिभस बीएस चौहान से मुलाकात की और उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की चिट्ठी उन्हें सौंपी।

मुलाकात के बाद बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव ने कहा कि बीजेपी प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि कानून के प्रावधानों में संशोधन होना चाहिए ताकि एक साथ चुनाव हो सकें। उन्होंने कहा कि देश में अगर एक साथ चुनाव होते हैं, तो सरकारी खर्चे में काफी बचत होगी। इस दौरान उन्होंने दुनिया के कई देशों का उदाहरण भी दिया।

उनका कहना है कि देश में अभी 9 लाख 30 हज़ार बूथ हैं, जिनपर करीब 1 करोड़ लोग काम करते हैं. उन्होंने कहा कि 2011 में चुनावों में करीब 16-1700 करोड़ रुपए का खर्चा हुआ तो वहीं 2014 में 4000 करोड़ का खर्च हुआ। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव करवाने से पैसा बचेगा।

वही BJP अध्यक्ष अमित शाह ने लॉ कमीशन के चेयरमैन जस्टिrस बलवीर चौहान को खत लिखते हुए एक देश-एक चुनाव पर पार्टी के समर्थन का दावा किया। उन्होंने इस दौरान कई बातें रखीं, जिसमें सरकार की राय, आचार संहिता के कारण विकास के कामों में बाधा आना, जैसे कई मुद्दे शामिल रहे।

देश में लोकसभा व विधानसभा चुनावों को एक साथ कराए जाने को लेकर लॉ कमीशन ने पिछले दिनों के सत्र में देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श भी किया था। इसमें 13 दल पहुंचे थे और अपनी बात रखी थी।

एक साथ चुनाव कराए जाने के पक्ष में शिरोमणि अकाली दल, अन्नाद्रमुक, समाजवादी पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति ने अपना पक्ष रखा। इन दलों ने कब चुनाव कराए जाएं इस पर अलग अलग राय रखी, लेकिन उन्होंने एक साथ ही चुनाव कराने का समर्थन किया। दूसरी तरफ नौ दलों ने एक साथ चुनाव कराए जाने का विरोध किया है। इनमें टीएमसी, आम आदमी पार्टी, द्रमुक, तेलुगुदेशम, माकपा, भाकपा, फारवर्ड ब्लाक व जेडीएस शामिल थे।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर विचार करने की बात कर चुके हैं। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि विपक्षी दल इसपर विचार करे। मोदी सरकार का मानना है कि एक साथ चुनाव कराए जाने से खर्च, समय और मैन पावर बचेगा। वहीं विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार के फैसले से राज्यों को नुकसान होगा। इससे एक तरह की सरकार को बल मिलेगा जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।


author
अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

कमेंट करें