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18 बहादुर बच्चों को मिलेगा 'राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार', जानिए वीरों की पूरी कहानी

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| जनवरी 21 , 2018 , 07:32 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 जनवरी को एक विशेष समारोह के दौरान वीरता एवं अदम्य साहस का परिचय देने तथा अपने प्राण जोखिम में डालकर औरों की जान बचाने वाले 18 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। इन 18  बच्चों में 11 लड़के और 7 लड़कियां शामिल हैं। तीन बच्चों को उनके अप्रतिम साहस के लिए मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन में इन बच्चों के लिए रिसेप्शन की मेजबानी करेंगे। ये सभी बच्चे 26 जनवरी को निकलने वाली परेड में भी शामिल होंगे। यह वीरता पुरस्कार 6 से 18 साल की उम्र के बच्चों को हर साल दिया जाता है।

आइये जानते हैं इन बहादुर बच्चों के बारे में:

नाजिया खान:

नाजिया को गैर कानूनी धंधे में जुड़े लोगों ने जान से मार डालने की धमकी भी दी इसके बावजूद जुए और सट्टेबाजी के गैरकानूनी धंधे को बंद कराने में जुटी रही उत्तर प्रदेश के आगरा की 18 वर्षीय नाजिया खान को शीर्ष वीरता सम्मान भारत अवार्ड से नवाजा जाएगा।

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ममता दलाई:

सम्मानित बच्चों में सबसे छोटी ओडिशा की छह साल आठ महीने की ममता दलाई है जो अपनी बहन को बचाने के लिए मगरमच्छ से भिड़ गई और उसे भगाकर ही मानी।

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नेत्रवती चव्हाण (मरणोपरांत):

कर्नाटक की 14 साल की इस बहादुर बिटिया ने अपनी जान गंवा दो लड़कों को डूबने से बचा लिया। पिछले साल मई में नेत्रवती एक तालाब के पास कपड़े धो रही थी। उसके सामने दो लड़के तालाब में गए और करीब 30 फीट की गहराई में डूबने लगे। बिना एक पल गंवाए नेत्रवती ने तालाब में छलांग लगा दी।

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पहले उसने खुद से बड़े लड़के मुथू (16 साल) को बचाया। नेत्रवती इसके बाद गणेश (10 साल) को बचाने फिर तालाब में उतरी। रेस्क्यू के क्रम में गणेश ने जोर से उसका गला पकड़ लिया। नेत्रवती खुद को नहीं बचा पाई। देश को अपनी इस बहादुर बेटी पर हमेशा नाज रहेगा। नेत्रवती को मरणोपरांत गीता चोपड़ा अवॉर्ड दिया जाएगा।

करणबीर सिंह:

संजय चोपड़ा पुरस्कार अमृतसर के 17 वर्षीय करणबीर को मिला है। उसने नहर में गिरी स्कूल बस के डूबने के बाद अपनी जान बचाने के बजाए 15 बच्चों को बचाया।

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लक्ष्मी यादव:

छत्तीसगढ़ के रायपुर की रहने वाली 16 साल की इस बहादुर बेटी ने खुद के यौन शोषण के प्रयास को विफल किया।

पंकज सेमवाल:

उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल इलाके के 16 साल के इस लड़के ने तेंदुए से अपनी मां की जान बचाई।

समृद्धि शर्मा:

गुजरात की इस 16 साल की बेटी ने घर में घुस आए बदमाश का बहादुरी से मुकाबला किया। इस दौरान बदमाश ने छूरा मार समृद्धि को घायल भी कर गिया। इसके बावजूद बहादुर बिटिया बदमाश को भगाने में कामयाब हो गई।

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले अन्य बच्चे:

पुरस्कार से नवाजे जाने वाले साहसी बच्चों में मेघालय के बेत्शवाजॉन पीनलांग, नगालैंड की मानशा एन., एन. शेंगपॉन कोनयक, योकनेई, चिंगाई वांग्सा, , मिजोरम के जोनुनलुआंगा और एफ. लालछंदमा, महाराष्ट्र के नदाफ एजाज अब्दुल राउफ, मणिपुर से लोकरापाम राजेश्वरी चानू, ओडिशा से पंकज कुमार महंत, केरल के मास्टर सेबेस्टियन विसेंट शामिल हैं।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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