ओपिनियन

न जाने कब देशभक्ति की प्रतियोगिता ने ले लिया सांप्रदायिक हिंसा का रूप

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| जनवरी 31 , 2018 , 16:18 IST

26 जनवरी का दिन था कासगंज में जहां एक तरफ हिन्दू भाई बाइको पर सवार तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे, तो वहीं दूसरी और मुस्लिम भाई तिरंगा फहराने की तैयारी में थे। लेकिन किसी ने ये सोचा न था कि ये देशभक्ति सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लेगी। आजकल देश भक्ति को भी पैमाने से नापा जा रहा है। मानो कोई प्रतियोगिता हो जिसमे हर कोई आगे निकलना चाहता हो।

प्रतियोगिता शुरू हो गयी थी, नौजवान थे, उनके हाथों में तिरंगा झंडा और जुबान पर देश भक्ति के नारे। कुछ इस प्रकार से तिरंगा यात्रा तो हम भी निकालते थे लेकिन उसमे हमारे मुस्लिम भाई भी साथ होते थे और हम सड़को पर भारत माता की जय चिल्लाते थे जैसे हम सब के बीच ज्यादा तेज चिल्लाने और देश भक्ति दिखाने की प्रतियोगिता हो रही हो। चलिए अपनी बात छेड़ ही देते है.....

कासगंज में देशभक्ति की प्रतियोगिता शुरू हो गयी थी वीर अब्दुल हमीद तिराहे पर मुस्लिम तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे थे। सड़क पर कुर्सियां लगाई जा चुकी थीं। तिरंगे गुब्बारे लगाए गए थे। तिरंगा फहराया ही गया था कि अचानक एबीवीपी के छात्र तिरंगा यात्रा लेकर आ गए। सभी बाइकों पर थे। हाथों में तिरंगा और भगवा झंडा था।

कहा जा रहा है कि नारेबाजी की जा रही थी- भारत में यदि रहना होगा, वंदे मातरम कहना होगा। मुस्लिम भाइयो द्वारा तिरंगा यात्रा में व्यवधान के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के युवाओं ने स्वयं को अपमानित माना। फिर सभी कार्यकर्ता एकत्रित होकर बिलराम गेट बाजार की तरफ आ गए।

नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते दोनों ओर से पथराव होने लगा। इसी दौरान हुई फायरिंग में बीकॉम के छात्र चंदन गुप्ता की मौत हो गई। देखते ही देखते कासगंज में देशभक्ति की इस प्रतियोगिता ने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया था। देखते ही देखते कासगंज हिंसा की आग में सुलगने लगा था। सोशल मीडिया पर लोग चंदन को शहीद का दर्जा देने लगे।

लोगों ने मुख्यमंत्री जी से चंदन गुप्ता को शहीद का दर्जा देने की मांग की। इस बात से मैं काफी अचंभित हूं। सड़को पर तिरंगा यात्रा निकाल कर गोली खाना शहीद कहलाना है तो मैं बॉर्डर पर जाकर गोली खाना ज्यादा पसंद करुगा।

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शहीद का दर्जा पाना इतना आसान हो जायेगा तो लोग भगत सिंह को भी भूल जाएगे। न जाने हमारे सेना के कितने जवान आये दिन देश के खातिर कुर्बान हो जाते है। चंदन के साथ जो हुआ उसका मुझे उसका दुःख है। यह देश हिन्दुओं और मुसलमानों से मिलकर बना है हमारी एकता  ही हमारी ताकत है। लेकिन यह बात हम समझ नहीं पाते और अंधभक्त होकर जोश में होश खो देते है।

कासगंज में हुई यह सांप्रदायिक हिंसा देशभक्ति की प्रतियोगिता में हार जीत के कारण हुआ या यह एक सोची समझी साजिश थी ? आखिर पुलिस और प्रशासन कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा को काबू करने में नाकाम क्यों हुई? ऐसे कई सवाल है जिनके जवाब न जाने कब मिलेगे। लेकिन हां एक बात तो समझ आ गई है कि इस देश के कण कण में देशभक्ति है भाईसाहब....