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35-A पर सुप्रीम कोर्ट की टली सुनवाई, जम्मू कश्मीर में हालात समान्य होने के आसार

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 6 , 2018 , 11:47 IST

जम्मू-कश्मीर को भारत के सभी राज्यों में विशेष राज्य का दर्जा दिलाने वाले संविधान के आर्टिकल 35-A को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी जिसे अभी सुप्रीम कोर्ट ने टाल दिया है। अगली सुनवाई 27 को होगी। इसकी वजह से कश्मीर का महौल गर्माया हुआ है। इसी माहौल को देखते हुए अमरनाथ की यात्रा को भी रोक दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में इस मसले की गर्माहट से ये अनुमान लगाया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट कोई भी फैसला दे लेकिन इसका राजनीतिक दृष्टी से दुरगामी परिणाम होगा।

राज्य के रामबन, डोडा और किश्तवाड़ से अनुच्छेद 35 ए के समर्थन में आंशिक हड़ताल और शांतिपूर्ण रैलियों की खबर है। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने अनुच्छेद 35 ए को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दिए जाने के खिलाफ दो दिन की हड़ताल का आह्वान किया है।

आर्टिकल को भेदभावपूर्ण बताते हुए दिल्ली के एनजीओ 'वी द सिटिजन' ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। रविवार को कश्मीर के कई जिलों में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसके विरोध में दो दिन के बंद का आह्वान भी किया है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने भारी सुरक्षाबल की तैनाती की है। आर्टिकल को कायम रखने के पक्ष में अलगाववादियों की संस्था JRL (जॉइंट रजिस्टेंट लीडरशिप) ने रविवार और सोमवार को घाटी बंद रखने का ऐलान किया।

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बंद को कारोबारियों, ट्रांसपोर्टर और बार असोसिएशन का भी पूरा समर्थन है। घाटी में रविवार और सोमवार को ट्रेन सेवाएं सस्पेंड रखी गई हैं। अमरनाथ यात्रा को भी ऐहतियातन दो दिन के लिए रोका गया है। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया विभाग ने राज्यपाल प्रशासन को अगाह किया है कि सोमवार को अगर सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 35ए पर कोई 'विपरीत' फैसला देता है तो राज्य की पुलिस में ही 'विद्रोह' हो सकता है।

फैसल शाह का ट्वीट, अनुच्छेद रद्द करेंगे तो रिश्ता खत्म-: 

सोशल मीडिया पर अपनी एक टिप्पणी के कारण पूर्व में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके आईएएस अफसर शाह फैसल ने रविवार को संविधान के अनुच्छेद 35-ए की तुलना निकाहनामे (विवाह दस्तावेज) से की। फैसल ने ट्वीट किया, 'आप इसे रद्द करेंगे और रिश्ता खत्म हो जाएगा। बाद में बात करने के लिए कुछ नहीं बचेगा।' पूर्व मंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता नईम अख्तर ने फैसल के ट्वीट को रिट्वीट किया और अपने विचार भी जोड़े। उन्होंने ट्वीट किया, 'इसे रद्द किया जाना वैवाहिक दुष्कर्म जैसा होगा। एक संवैधानिक संबंध को यह कब्जे में बदल देगा।' 

दिल्ली के एनजीओ ने दी है 35ए को चुनौती-:

दिल्ली की एक गैर सरकारी संस्था 'वी द सिटिजंस' ने सर्वोच्च अदालत में इस अनुच्छेद को चुनौती दी है और मामले में केंद्र सरकार ने पिछले महीने कहा था कि इस अनुच्छेद को असंवैधानिक करार देने से पहले इस पर वृहद चर्चा की जरूरत है। याचिकाकर्ता संगठन का कहना है कि 1954 में राष्ट्रपति ने इस अनुच्छेद को शामिल करने के लिए संविधान में संशोधन नहीं किया था, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी बंदोबस्त था।

क्या है अनुच्छेद 35ए-:

अनुच्छेद 35ए को लेकर जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से विरोध है। इस अनुच्छेद के जरिये वहां की सरकार और लोगों को विशेष अधिकार प्राप्त है कि वहां का स्थायी निवासी कैसे तय होगा। इसके तहत वहां की सरकार को ये अधिकार मिल जाता है कि वो आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए लोगों और देश के अन्य क्षेत्र के लोगों को किस तरह की सहूलियतें दे या नहीं दे। यह अनुच्छेद 14 मई 1954 से जम्मू-कश्मीर में लागू है। तब राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। उनके ही आदेश पर ही यह अनुच्छेद पारित हुआ था।

क्यों है अनुच्छेद 35ए का विरोध-:

बताते चलें कि अनुच्छेद 35ए, धारा 370 का ही एक हिस्सा है। इसकी वजह से दूसरे राज्य के नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकते। महिलाओं में इस अनुच्छेद का खासा विरोध है। अगर जम्मू-कश्मीर की किसी महिला की दूसरे राज्य में शादी हो जाती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं। साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।

 


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