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35A पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, जम्मू-कश्मीर में तनाव, कई इलाकों में बंद

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 27 , 2018 , 15:03 IST

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35A को लेकर अफवाहों के कारण पत्थरबाजों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष भड़क गया। जिसको देखते हुए कश्मीर के कई इलाकों को बंद कर दिया गया। यह बंद श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग जिले में कई स्थानों पर देखा जा रहा है। लोगों ने बताया कि अनुच्छेद 35A को हटाने को लेकर लाउडस्पीकरों पर घोषणाएं की गईं और लोगों से बंद करने और विरोध में बाहर आने की अपील की गई। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में आज इस मामले को लेकर सुनवाई नहीं हो पाई। 

अधिकारी ने बताया, ‘अनुच्छेद 35A को समाप्त करने संबंधी अफवाहों के जंगल की आग तरह फैलने और सोशल मीडिया पर इसके प्रसार के बाद आज सुबह खुली दुकानें और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद कर दिए गए।’ उन्होंने बताया कि अफवाहों के बाद अनंतनाग और यहां सफाकादल इलाके में सुरक्षाबलों और पत्थरबाजों के बीच संघर्ष देखने को मिला।

एक बयान में पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। बयान में कहा गया है, ‘मीडिया के कुछ वर्गों में अनुच्छेद 35A के संबंध में खबरें प्रसारित हुई हैं। निराधार होने के कारण खबरों का खंडन किया जाता है। लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की जाती है। मामले पर मुख्य सुनवाई 31 अगस्त को होनी है।’

जानें क्या है अनुच्छेद 35A-:

इस अनुच्छेद को लागू करने के लिए तत्कालीन सरकार ने धारा 370 के अंतर्गत प्राप्त शक्ति का इस्तेमाल किया था। इतिहास की माने तो इसे राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई 1954 को लागू किया था। इस आदेश के राष्ट्रपति द्वारा पारित किए जाने के बाद भारत के संविधान में इसे जोड़ दिया गया। अनुच्छेद 35A धारा 370 का हिस्सा है। इस धारा के तहत जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी भी राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता इसके साथ ही वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता।

धरती की जन्नत का नागरिक वो ही माना जाएगा जो कि 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो या इससे पहले या इसके दौरान वहां पहले ही संपत्ति हासिल कर रखी हो। उदाहरण के तौर पर इसके साथ ही अगर जम्मू-कश्मीर की लड़की किसी बाहरी लड़के से शादी करती है तो उसके सारे अधिकार समाप्त हो जाएंगे। इसके साथ ही उसके बच्चों को भी किसी तरह के अधिकार नहीं मिलेंगे।

क्यों अनुच्छेद 35A हटाए जाने की हो रही है बात -:

इसे खत्म करने की बात इसलिए हो रही है क्योंकि इस अनुच्छेद को संसद के जरिए लागू नहीं किया गया है, दूसरा कारण ये है कि इस अनुच्छेद के ही कारण पाकिस्तान से आए शरणार्थी आज भी राज्य के मौलिक अधिकार और अपनी पहचान से वंचित हैं।

अनुच्छेद 35A पर उठते हैं कई सवाल...

अब सवाल ये है कि यदि अनुच्छेद 35A असंवैधानिक है तो सर्वोच्च न्यायालय ने 1954 के बाद से आज तक कभी भी इसे असंवैधानिक घोषित क्यों नहीं किया? यदि यह भी मान लिया जाए कि 1954 में नेहरु सरकार ने राजनीतिक कारणों से इस अनुच्छेद को संविधान में शामिल किया था तो फिर किसी भी गैर-कांग्रेसी सरकार ने इसे समाप्त क्यों नहीं किया?


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