राजनीति

अशोक गहलोत: पढ़िए 'राजनीति के जादूगर' का सियासी सफरनामा, बिस्किट और चाय के हैं शौकीन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| दिसंबर 14 , 2018 , 17:37 IST

राजस्थान में पिछले तीन दिन से मुख्यमंत्री के नाम के लिए जारी जद्दोजहद थम गई है। कांग्रेस की तरफ से ऐलान कर दिया गया है कि दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री की गद्दी संभाल चुके अशोक गहलोत फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। अशोक गहलोत को प्रदेश की सियासत में जमीन से जुड़ा नेता माना जाता है। गहलोत के साथ सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय गहलोत राजस्थान में काफी लोकप्रिय रहे हैं और उन्हें 'राजनीति का जादूगर' और 'मारवाड़ का गांधी' जैसे उपनामों से भी बुलाया जाता है।

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साल 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव और फिर 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद भी अशोक गहलोत ने राज्य में अपनी पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखा। राजस्थान में ‘राजनीति का जादूगर’ माने जाने वाले गहलोत ने 2018 के राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत के जादुई आंकड़े के करीब लाने में अहम भूमिका निभाई है।

इंदिरा गांधी की मदद से राजनीति में आए थे अशोक गहलोत

जानकारों का कहना है कि ‘मारवाड़ का गांधी’ माने जाने वाले गहलोत को राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लेकर आई थीं। ऐसा कहा जाता है कि वह पूर्वोत्तर क्षेत्र में शरणार्थियों के बीच अच्छा काम कर रहे थे और इंदिरा उनके काम से काफी प्रभावित थीं। कुछ महीने पहले गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दमदार प्रदर्शन का श्रेय गहलोत को ही दिया जाता है।

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पिछले कुछ समय से कांग्रेस के महासचिव (संगठन) का पदभार संभाल रहे गहलोत को जमीनी नेता और अच्छा संगठनकर्ता माना जाता है। मूल रूप से जोधपुर के रहने वाले गहलोत (67 वर्ष) 1998 से 2003 और 2008 से 2013 तक राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। तीन मई 1951 को जन्मे गहलोत ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1974 में एनएसयूआई के अध्यक्ष के रूप में की थी। वह 1979 तक इस पद पर रहे। गहलोत 1979 से 1982 तक कांग्रेस पार्टी के जोधपुर जिला अध्यक्ष रहे और 1982 में प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव बने। उसी दौरान 1980 में गहलोत सांसद बने।

गहलोत पांच बार लोकसभा सांसद और कई बार मंत्री रहे

गहलोत 1980 से 1999 तक पांच बार 7वीं, 8वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा के लिए भी चुने गए। गहलोत 1999 से जोधपुर के सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह 11वीं, 12वीं,13वीं और 14वीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। पांच बार सांसद रह चुके गहलोत पांचवीं बार विधायक बने हैं। वह 1982-1983 तक पर्यटन उप-मंत्री और 1983-84 में नागरिक उड्डयन, 1984 में खेल उप-मंत्री, 1984-85 में पर्यटन और नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री, 1991-93 तक वस्त्र राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पदभार संभाल चुके हैं। गहलोत 2004-2009 तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के महासचिव (दिल्ली और सेवादल प्रभारी), 2004 में कांग्रेस कार्य समिति और हिमाचल प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके हैं।

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राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमिटी में कई अहम पदों पर रह चुके गहलोत तीन बार कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं। कई देशों की यात्रा कर चुके गहलोत ने राजनीति के अलावा 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी शरणार्थियों के शिविरों में काम किया और कई सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहे। गहलोत ने सुनीता गहलोत से विवाह किया। उनके एक पुत्र और एक पुत्री है।

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