नेशनल

पूरी सैलरी चाहिए तो करो माता-पिता की सेवा , पढ़े क्या है मामला

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
304
| सितंबर 16 , 2017 , 11:20 IST

असम विधानसभा ने शुक्रवार को बुजुर्ग लोगों से जुड़ा एक बेहद अहम बिल पास कर दिया। बिल के मुताबिक- गवर्नमेंट इम्प्लॉईज के लिए ये जरूरी होगा कि वो अपने पैरेंट्स और दिव्यांग भाई-बहनों की सही तरीके से देखभाल करें। अगर कोई सरकारी कर्मचारी ऐसा नहीं करता है तो सरकार उसकी सैलरी में से हर महीने एक तय रकम काट लेगी। यह पैसा उस कर्मचारी के पैरेंट्स या दिव्यांग भाई-बहनों पर खर्च की जाएगी। बता दें कि इस तरह का कानून बनाने वाला असम देश का पहला राज्य है।

कानून के मुताबिक अगर राज्य सरकार का कोई कर्मचारी अपने माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने से भागता है तो सरकार उसकी सैलरी का 10 प्रतिशत हिस्सा काट लेगी और उसे मां-बाप के खाते में ट्रांसफर कर देगी। अगर कर्मचारी का कोई भाई या बहन दिव्यांग है तो उसकी सैलरी से 5 प्रतिशत अतिरिक्त कटौती होगी।

असम एम्पलॉयीज पैरंट्स रेस्पॉन्सिबिलिटी ऐंड नॉर्म्स फॉर अकाउंटैबिलिटी ऐंड मॉनिटरिंग बिल-2017 नाम के इस कानून को असम एम्पलॉयीज प्रणाम बिल के नाम से जाना जाता है।

असम एम्पलॉयीज प्रणाम बिल पर विधानसभा में चर्चा के दौरान राज्य के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार को यह मंजूर नहीं कि कोई भी शख्स अपने बुजुर्ग मां-बाप को ओल्ड एज होम में छोड़कर जाए। उन्होंने दावा किया कि इस तरह का कानून बनाने वाला असम देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि आगे चलकर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इस कानून के दायरे में लाया जाएगा।

बता दें कि असम सरकार ने बजट सेशन में इस तरह का बिल लाने का वादा किया था। सरकार का कहना था कि असम के कई ओल्ड एज होम से इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि अच्छी नौकरी पाने वाले सरकारी कर्मचारियों ने भी पैरेंट्स को छोड़ दिया। फरवरी में सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने कहा था कि उनकी सरकार इस मसले को गंभीरता से ले रही है और इस सोशल प्रॉब्लम को दूर करने के लिए कानून बनाया जाएगा। अब असम सरकार के कर्मचारियों को डीटेल में अपने पैरेंट्स और दिव्यांग भाई-बहनों की जानकारी डिपार्टमेंट को देनी होगी।


author
अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

कमेंट करें