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क्या आप जानते हैं! जब 7 लाख में बिक गया था ताजमहल, दो बार हो चुकी है नीलामी

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 17 , 2017 , 18:05 IST

बीजेपी विधायक संगीत सोम के ताजमहल पर बयान से बखेड़ा खड़ा हो गया है। विधायक का कहना है कि ताजमहल गद्दारों ने बनवाया था। लेकिन ताजमहल को लेकर ये कोई नया विवाद नहीं है। क्या आप जानते हैं कि ताजमहल की दो बार नीलामी हो चुकी है। सात लाख रुपये में ताजमहल नीलाम हो चुका है। अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं कि कैसे दो बार ताजमहल नीलाम हुआ।

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ब्रिटिश इतिहासकार की किताब में ताज की नीलामी का जिक्र

इतना ही नहीं अंग्रेज अफसर नीलामी में ऊंची बोली लगाने के बाद भी ताजमहल को लंदन नहीं ले जा पाए। इतिहासकार प्रोफेसर आर. रामनाथ की किताब ताजमहल और ब्रिटिश लेखक एचजी केन्स की किताब आगरा एंड नेबरहुड की मानें तो 1931 में ताजमहल की दो बार नीलामी हो चुकी है।

मथुरा के सेठ लखीमचंद ने खरीदा था ताजमहल

नीलामी में दो बार ऊंची बोली लगाने के चलते मथुरा के सेठ लख्मीचंद जैन ने ताजमहल को खरीदा था। सेठ जैन ने सात लाख रुपये की बोली लगाई थी। सेठ लख्मीचंद के प्रपौत्र सेठ विजय जैन ने ‘मथुरा सेठ’ नाम की अपनी किताब में इसका जिक्र भी किया है। कहा जाता है कि जब सेठ लख्मीचंद ताजमहल पर कब्जा लेने पहुंचे तो आगरा में उन्हें हिन्दू-मुस्लिम दोनों के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध के चलते सेठ ने कब्जा लेने का विचार त्याग दिया।

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कोलकाता के अखबार में आया था नीलामी का विज्ञापन

ब्रिटिश लेखक एचजी केन्स की किताब आगरा एंड नेबरहुड की मानें तो तत्कालीन बंगाल के गर्वनर लॉर्ड विलियम हेनरी कैवन्डिश (लॉर्ड बैंटिक) ने 1931 में ताजमहल की नीलामी कराई थी। नीलामी दो दिन तक चली थी। पहले दिन भारतीयों ने तो दूसरे दिन अंग्रेज अफसरों ने नीलामी में बोली लगाई थी। लेकिन यहां भी मथुरा के सेठ लख्मीचंद जैन ने सात लाख रुपये की ऊंची बोली लगाई थी।

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लंदन ले जाना चाहते थे ताजमहल के कीमती पत्थरों को

ब्रिटिश लेखक एचजी केन्स की मानें तो अंग्रेज अफसर ताजमहल के कीमती पत्थरों को लंदन ले जाना चाहते थे। लेकिन पत्थरों को लंदन ले जाने का खर्चा बहुत ज्यादा आ रहा था। इसलिए अंग्रेज अफसरों ने पत्थरों को लंदन ले जाने का विचार त्याग दिया।

 

 

 


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