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21वीं सदी के 'लैला मजनूं' की है ये दास्तां, फिल्म देखने से पहले जानें Review

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| सितंबर 7 , 2018 , 13:11 IST

इतिहास गवाह है कि दो प्यार करने वालों को जुदा करने के लिए चाहे पूरी दुनिया एक हो जाए भले इस दुनिया में  उनके जिस्म एक न हो पाएं लेकिन रूह उनका कभी साथ नहीं छोड़ती। प्यार की गहराई बताने के लिए सालों से लैला-मजनू, हीर-रांझा और शीरीं-फरहाद के उदारहण दिए जाते हैं। इन प्रेम कहानियों का अपना एक अलग ही इतिहास रहा है और हम कभी न कभी इनके बारे में जरुर सुनते हैं। भारतीय सिनेमा प्यार की ऐसी कहानियों को सालों से दिखाता आ रहा है। शुरूआत में हीरो-हीरोइन के बीच होने वाली प्यारी नोंक-झोंक दर्शकों के चेहरों पर मुस्कुराहट बिखेरती और अंत में जब दोनों बिना मिले ही दुनिया से चले जाते हैं तो दर्शकों की आंखों से आंसू बहने लगते हैं।

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फिल्म 'लैला मजनू'

सिनेमाघरों में आज रिलीज हुई डायरेक्टर साजिद अली की फिल्म 'लैला मजनू' भी ऐसी ही दुखद प्रेम कहानी हमारे सामने पेश करती है। नई लैला मजनू की कहानी कश्मीर बेस्ड है। तृप्ति डिमरी फिल्म में लैला के किरदार में हैं और अविनाश तिवारी क़ैस के, लैला कश्मीर के एक सम्मानित व्यक्ति की बेटी है और क़ैस उसी शहर के अमीर व्यक्ति के बेटे हैं. क़ैस की छवि पूरे शहर में एक बिगड़े रईसज़ादे वाली है। वहीं लैला अपने पिता की लाडली है. आज़ाद ख्यालों वाली लैला मस्तमौला सी लड़की है, थोड़ी सी शातिर है जिसे लड़कों को अपने पीछे घुमाने में मज़ा आता है. ऐसा ही कुछ करते हुए उनकी मुलाकात होती है क़ैस से, क़ैस लैला को देखते ही उसके प्यार में पड़ जाता है, लैला भी क़ैस को आज़माने के इरादे से उससे बातचीत करती है लेकिन बाद में उसे भी क़ैस से मोहब्बत हो जाती है. यहां तक सबकुछ ठीक रहता है. परेशानी तब शुरू होती है जब दोनों को ये एहसास होता है कि  उनके परिवार उनके इस रिश्ते को कभी मंज़ूरी नहीं देंगे क्योंकि वो पहले से ही किसी ज़मीन के सौदे को लेकर एक दूसरे के दुश्मन होते हैं। इस दुश्मनी की आग में घी का काम करते हैं सुमित कौल।

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जैसे ही इनके प्यार की खबर गांववालों को लगती है, वैसे ही वो लैला के घरवालों को इसकी जानकारी दे देते हैं। लैला के घरवाले उसकी शादी इब्बान (सुमित कौल) के साथ करा देते हैं, जो कि एक पॉलीटीशियन है। लैला की शादी के बाद कैस विदेश चला जाता है। उसे लगता है कि विदेश जाने के बाद वो लैला को भूल जाएगा। 4 साल के बाद कैस को दोबारा भारत आना पड़ता है क्योंकि उसके पिता की मौत हो जाती है। जैसे ही वो अपने गांव में कदम रखता है, वैसे ही उसे यह अहसास होता है कि वो लैला को पूरी तरह से नहीं भुला पाया है। इसके बाद शुरू होती है, उसकी जंग....। अब कैस को लैला दोबारा मिल पाएगी या नहीं ? और दोनों के सच्चे इश्क का भविष्य क्या होगा यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

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फिल्म की खामियां

फिल्म कई जगह पर धीमी पड़ती दिखाई देती है। लैलै और मजनू के प्यार की शुरूआत को जल्दी खत्म किया गया है जिससे उनके बीच प्यार की गहराई को दिखाना भी थोड़ा अजीब सा लगता है। फिल्म में अविनाश और तृप्ति का किरदार काफी अच्छा है लेकिन लैला के किरदार को थौड़ा और गढ़ा जाना जरुरी थी।

न्यूज वर्ल्ड इंडिया इस फिल्म को 5 से 3 स्टार देता है।

यहां देखें फिल्म का ट्रेलर


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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