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अयोध्या मामला: SC ने जल्द सुनवाई से किया इंकार, हिंदू महासभा ने दी थी याचिका

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 12 , 2018 , 12:38 IST

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में हिंदू महासभा की जल्द सुनवाई करने की याचिका को ठुकरा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग को ठुकराते हुए कहा कि वह इस मामले में पहले ही अपना रुख साफ कर चुके हैं। सुनवाई के लिए पहले ही तारीख दी जा चुकी है। अखिल भारतीय हिंदू महासभा की तरफ से वकील वरुण सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि इससे संबंधित अपील पहले भी आ चुकी है जिसकी सुनवाई जनवरी में होनी है। अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से शीघ्र सुनवाई के संबंध में अधिवक्ता बरूण कुमार के अनुरोध को खारिज करते हुए पीठ ने कहा, ''हमने आदेश पहले ही दे दिया है। अपील पर जनवरी में सुनवाई होगी। अनुमति ठुकराई जाती है।

आपको बता दें कि इससे पहले शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर को 1994 के अपने उस फैसले पर पुनर्विचार के मुद्दे को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ को सौंपने से इंकार कर दिया था जिसमें कहा गया था कि 'मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं है। यह मुद्दा अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान उठा था।

शीर्ष अदालत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 के बहुमत से अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला इस मामले में प्रासंगिक नहीं है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने अपनी और प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की ओर से फैसला सुनाते हुए कहा था कि उसे यह देखना होगा कि 1994 में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने किस संदर्भ में यह फैसला सुनाया था। दूसरी ओर, खंडपीठ के तीसरे सदस्य न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने दोनों न्यायाधीशों से असहमति व्यक्त करते हुये कहा कि धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए यह फैसला करना होगा कि क्या मस्जिद इस्लाम का अंग है और इसके लिये विस्तार से विचार की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 30 सितंबर, 2010 को 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाये।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर की पीठ ने आदेश दिया था कि विवादित भूमि के मालिकाना हक वाले दीवानी मामले की सुनवाई तीन जजों की पीठ 29 अक्टूबर से करेगी। पीठ ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं मानने वाले इस्माइल फारूकी मामले में 1994 के फैसले के अंश को पुनर्विचार के लिए सात जजों की पीठ को भेजने से इनकार कर दिया था।


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