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अयोध्या विवाद: जस्टिस यूयू ललित ने खुद को बेंच से किया अलग, जानिए क्या है वजह

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 10 , 2019 , 16:03 IST

अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई गुरुवार को फिर एक बार टल गई। इसकी नई तारीख 29 जनवरी तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने पांच जजों की बेंच में जस्टिस यूयू ललित के होने पर सवाल खड़े कर दिए। सवाल ठछाते हुए  उन्होंने कहा कि मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि आप अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के वक्त उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के वकील रहे हैं। इसके बाद जस्टिस ललित ने खुद को इस केस से अलग कर लिया। इसके साथ ही राजीव धवन ने यह केस तीन जजों की बेंच की बजाय पांच जजों की बेंच के पास भेजने पर भी सवाल खड़े किए। हालांकि, कोर्ट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

बता दें मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने जस्टिस ललित के बेंच में होने पर यह कहकर सवाल उठाया कि वह एक समय अयोध्या केस से जुड़े एक मामले में वकील के तौर पर पेश हो चुके हैं। सुनवाई शुरू होते ही मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस यू. यू. ललित 1997 में कल्याण सिंह की तरफ से बतौर वकील पेश हुए थे। इस पर वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि जिस मामले में जस्टिस ललित पेश हुए थे, वह इस मामले से बिल्कुल अलग था। वह एक आपराधिक मामला था। इस पर धवन ने कहा कि वह यह मांग नहीं कर रहे हैं कि जस्टिस ललित बेंच से अलग हो जाएं, वह बस जानकारी के लिए यह बता रहे थे। इसके बाद, खुद जस्टिस ललित ने केस की सुनवाई से हटने की इच्छा जताई।

जस्टिस ललित द्वारा बेंच से खुद को अलग किए जाने के फैसले के बाद सीजेआई ने कहा कि जस्टिस ललित अब इस बेंच में नहीं रहेंगे, लिहाजा सुनवाई स्थगित करनी पड़ेगी। अब अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच का गठन किया जाएगा और जस्टिस ललित की जगह पर नए जज को बेंच में शामिल किया जाएगा।

सुनवाई से सियासी बयानबाजी तेज

श्रीराम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर सुप्रीम सुनवाई से पहले बयानाबाजी भी शुरु हो गई है। अनेक हिंदू संगठन विवादित स्थल पर राम मंदिर का जल्द निर्माण करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने गुरुवार को राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम होना चाहिए।

न्यायिक प्रक्रिया के बाद अध्यादेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने के बारे में निर्णय किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद संघ, विहिप, शिवसेना समेत तमाम हिंदू संगठनों ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा, सरकार राम मंदिर पर अध्यादेश लाकर मंदिर का निर्माण कराए।

इलाबाहाद हाईकोर्ट का फैसला

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2010 में अपने फैसले में 2.77 एकड़ भूमि का सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच समान रूप से बंटवारा करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 29 अक्टूबर को कहा था कि यह मामला जनवरी के प्रथम सप्ताह में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा, जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी। बाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा ने एक अर्जी दायर कर सुनवाई की तारीख पहले करने का अनुरोध किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था।


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