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कुछ यूँ हुई थी जावेद अख्तर और शबाना आजमी में मुहब्बत,बड़ी दिलचस्प है कहानी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 17 , 2018 , 13:52 IST

कवि, गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। जावेद अख्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था। जावेद के पिता जान निसार अख्तर एक लोकप्रिय कवि और मां सफिया अख्तर फेमस उर्दू शिक्षिका थीं। अब जावेद अख्तर जी 73 के हो चुके हैं। 

सलीम के साथ उनकी जोडी ने 'अंदाज' से लेकर, 'यादों की बारात', 'जंजीर', 'दीवार','हाथी मेरे साथी' और 'शोले' समेत ना जाने कितनी सुपरहिट फिल्मों की पटकथाएं लिख डाली। इस जोडी को सिनेमा में सलीम-जावेद के नाम से भी जाना जाता है।

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जावेद साहब को साल 1999 में पद्म भूषण और 2007 में पद्म भूषण से नवाजा जा चुका है।आपको बता दें जावेद अख्तर और उनकी पहली पत्नी हनी ईरानी भी पटकथा लेखक थीं। हनी ईरानी का भी जन्मदिन 17 जनवरी को होता है। इन दोनों ने साल 1972 में शादी की थी। तब हनी की उम्र सिर्फ 17 साल थी।

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बता दें तलाक के बाद भी जावेद अख्तर और हनी ईरानी के बीच दोस्ती बरकरार है। जानकारी के लिए बता दें जावेद और ईरानी के दो बच्चे हैं फरहान अख्तर और जोया अख्तर। तलाक के बाद जावेद अख्तर हर दिन हनी ईरानी को फोन करते थे। वह बच्चों से मिलने घर भी आते थे क्योंकि हनी ने भी जावेद और बच्चों के बीच कभी दीवार खड़ी नहीं की।

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यही वजह रहा कि आज दोनों के बीच रिश्ते उतने मजबूत हो चुके हैं जितने वे तब भी नहीं थे जब उन दोनों ने शादी की थी। जावेद साहब और ईरानी साल 1978 में अलग हो गये। इस बीच जावेद और अभिनेत्री शबना आजमी के बीच प्यार परवान पर चढ़ा। जिसके बाद साल 1985 में जावेद और हनी ने तलाक ले लिया। जिसके तुरंत बाद ही जावेद अख्तर ने अभिनेत्री शबना आजमी से दूसरी शादी कर ली।

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आज भले ही हनी ईरानी और शबाना आजमी के रिश्ते सहेली वाले ना हो, मगर वों सौतन जैसे भी नहीं हैं। हनी ईरानी ने जावेद अख्तर और शबाना आजमी के रिश्ते के बारे में कभी भी कोई भी आपत्तिजनक बयान नहीं दिया। जब कभी भी हनी ईरानी और शबाना आजमी का आमना-सामना होता है वे दोनों एक दूसरे से अदब से पेश आती हैं।

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भोपाल के सेफिया कॉलेज से ग्रैजुएशन करने के बाद जावेद मुंबई चले गए। 1964 में जब जावेद ने पहली बार मुंबई में कदम रखा तो उनकी जेब में चंद पैसे थे। उनके पास न तो मुंबई में रहने के लिए घर था और न ही खाने के लिए रोटी। जैसे तैसे करके उन्होंने मुंबई में दो साल बबिताए जिसके बाद भी उन्हें कोई खास काम नहीं मिल सका था।

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इसके बाद उन्हें फिल्मों में क्लैपर ब्वॉय का काम मिला। वक्त गुजारने के साथ साथ उन्हें फिल्मों में बतौर राइटर काम मिलना शुरू हुआ।वो एक दौर था और ये एक दौर है जब ऐसा कोई भी नहीं जिसको जावेद अख्तर के बारे में पता नहीं है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर आज इतना बड़ा साम्रज्य खड़ा कर दिया। कुछ भी हो आज जावेद अख्तर किसी पहचान के मुहताज नहीं हैं।


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