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अब तक के सबसे बुरे दौर में अर्थव्यवस्था, 14 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा निवेश

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 4 , 2019 , 14:28 IST

अर्थव्यस्था में जल्द तेजी आने की उम्मीदों को जोरदार झटका लगा है। दिसंबर में समाप्त हुई तिमाही में नया निवेश 14 सालों के निचले स्तर पर पहुंच गया। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के प्रॉजेक्ट-ट्रैकिंग डेटाबेस के ताजा आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। भारतीय कंपनियों ने दिसंबर तिमाही में एक लाख करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट की घोषणा की है, जो सितंबर तिमाही की तुलना में 53 फीसदी कम और पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 55 फीसदी कम है।

निजी और सरकारी दोनों ही क्षेत्रों में कम हुआ निवेश

रिपोर्ट के मुताबिक, निजी क्षेत्र में निवेश पिछली तिमाही से 62 फीसदी कम है। वहीं सरकारी क्षेत्र में भी निवेश 37 फीसदी तक कम हो गया है। सरकारी प्रोजेक्ट्स में 50,604 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो साल 2004 के बाद सबसे निचले स्तर पर है। सबसे ज्यादा गिरावट मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में हुई है। इसके लिए बढ़ते एनपीए को भी जिम्मेदार बताया गया है।

कई पुराने प्रोजेक्ट्स अटके हुए हैं

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पुराने प्रोजेक्ट्स भी अटके हुए हैं और उनके लिए पैसों की कमी हो रही है। रोजगार और किसानों की हालत को लेकर पहले से ही आलोचनाओं का सामना कर रही सरकार अब इस मुद्दे पर भी घिरती नजर आ रही है। नई परियोजनाओं में यह गिरावट निजी क्षेत्र द्वारा प्रॉजेक्ट की घोषणाओं में कमी के कारण सामने आई है। सितंबर तिमाही की तुलना में दिसंबर तिमाही में निजी क्षेत्र की परियोजनाओं में 62 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में इसमें 64 फीसदी की गिरावट आई है।

2004 के बाद निवेश सबसे निचले स्तर पर

चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही की तुलना में दिसंबर तिमाही में नई सरकारी परियोजनाओं में भी गिरावट देखने को मिली है। दिसंबर तिमाही में ताजा निवेश में पिछली तिमाही की तुलना में 37 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 41 फीसदी की गिरावट देखी गई है, जो दिसंबर 2004 के बाद अपने निचले स्तर पर है। सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में ताजा निवेश में गिरावट देखी गई है। इसमें केवल कंस्ट्रक्शन क्षेत्र ही अपवाद है, जिसमें दिसंबर तिमाही में मामूली सुधार दर्ज किया गया है।

बैड लोन में लगातार बढ़ोतरी, चुनावों से पहले नीतियों की अनिश्चितताओं में बढ़ोतरी और लटकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में किसी प्रकार का सुधार नहीं होना भारतीय उद्योग के उत्साह पर भारी पड़ा है। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में लटकी परियोजनाओं की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है।


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