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बाल ठाकरे और उनके चर्चित किस्से (बर्थडे स्पेशल)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 23 , 2018 , 02:40 IST

भारत के महाराष्ट्र प्रदेश के प्रसिद्ध राजनेता बाल ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1926 पुणे में केशव सीताराम ठाकरे के यहाँ हुआ था। उनके पिता एक प्रगतिशील सामाजिक कार्यकर्ता व लेखक थे जो जातिप्रथा के विरोधी थे।बाल ठाकरे ने शिव सेना के नाम से एक प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी दल का गठन किया था। इन्हें लोग प्यार से बालासाहेब भी कहते थे।

वे मराठी में सामना नामक अखबार निकालते थे।इस अखबार में उन्होंने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पूर्व अपने सम्पादकीय में लिखा था-"आजकल मेरी हालत चिन्ताजनक है किन्तु मेरे देश की हालत मुझसे अधिक चिन्ताजनक है, ऐसे में भला मैं चुप कैसे बैठ सकता हूँ?" उनके अनुयायी उन्हें हिन्दू हृदय सम्राट कहते थे।बाल ठाकरे ने अपने जीवन का सफर एक कार्टूनिस्ट के रूप में शुरू किया था।

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पहले वे अंग्रेजी अखबारों के लिये कार्टून बनाते थे। बाद में उन्होंने सन 1960  में मार्मिक के नाम से अपना एक स्वतन्त्र साप्ताहिक अखबार निकाला और अपने पिता केशव सीताराम ठाकरे के राजनीतिक दर्शन को महाराष्ट्र में प्रचारित व प्रसारित किया।19 जून 1966 में उन्होंने महाराष्ट्र में शिव सेना नामक एक कट्टर हिन्दूराष्ट्र वादी संगठन की स्थापना की।मराठी भाषा में सामना के अतिरिक्त उन्होंने हिन्दी भाषा में दोपहर का सामना नामक अखबार भी निकाला।

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इस प्रकार महाराष्ट्र में हिन्दी व मराठी में दो-दो प्रमुख अखबारों के संस्थापक भी थे बाला साहब। खरी-खरी बात कहने और विवादास्पद बयानों के कारण वे हमेशा सुर्खियों में बने रहे।हालांकि शुरुआती दौर में बाल ठाकरे को अपेक्षित सफलता नहीं मिली लेकिन अंततः उन्होंने शिव सेना को सत्ता की सीढ़ियों पर पहुँचा ही दिया। 1995 में भाजपा-शिवसेना के गठबन्धन ने महाराष्ट्र में अपनी सरकार बनाई।

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हालांकि 2005 में उनके बेटे उद्धव ठाकरे को अतिरिक्त महत्व दिये जाने से नाराज उनके भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ दी और 2006 में अपनी नई पार्टी 'महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना' बना ली।बाल ठाकरे अपने उत्तेजित करने वाले बयानों के लिये जाने जाते थे और इसके कारण उनके खिलाफ सैकड़ों की संख्या में मुकदमे दर्ज किये गये थे।भारत देश के विवादित नेता के तौर पर जाने जाने वाले बाल ठाकरे पर कई बार कानून तोड़ने के आरोप लगे लेकिन ठाकरे हमेशा ही ऐसे बोल बोलते रहे।

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बाबरी ध्वंस से लेकर उत्तर भारतीयों पर हमलों के आरोप के बावजूद भी ठाकरे हमेशा महाराष्ट्र में सत्ता के केंद्र बिंदू बने रहें। उन्होंने महाराष्ट्र में मराठी भाषी लोगों को संगठित करने के लिये संयुक्त मराठी आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभायी और मुंबई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाने में काम किया।बालासाहेब का विवाह मीना ठाकरे से हुआ। उनसे उनके तीन बेटे हुए-बिन्दुमाधव, जयदेव और उद्धव ठाकरे।उनकी पत्नी मीना और सबसे बड़े पुत्र बिन्दुमाधव का 1996 में निधन हो गया।

उन्होंने अपना जीवन मुंबई के प्रसिद्ध समाचारपत्र फ्री प्रेस जर्नल में कार्टूनिस्ट के रूप में प्रारम्भ किया। इसके बाद उन्होंने फ्री प्रेस जर्नल की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और 1960 में अपने भाई के साथ एक कार्टून साप्ताहिक मार्मिक की शुरुआत की। बाल ठाकरे सचिन को बहुत पसंद करते थे।वें हमेशा ही एक सख्त और कट्टर राजनेता माने जाते थे।जिस आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय कहा जाता है बाल ठाकरे उसके कट्टर समर्थक थे।

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जानकारी के लिए बता दें बाल ठाकरे के स्वभाविक वारिस के तौर पर लोग उनके बेटे उद्धव को नहीं बल्कि उनके भतीजे राज ठाकरे को देखते थे। लोगों को ऐसी उम्मीद थी कि बाल ठाकरे कमान राज को हीं सौंपेंगे लेकिन इसके ठीक उलटा होते ही राज ने शिवसेना छोड़ अपनी खुद की पार्टी MNS बना ली। इतना ही नहीं बाल ठाकरे का फिल्मी दुनिया से भी गहरा नाता रहा है।एक बार उन्होंने संजय दत्त की मदद भी की थी।

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जबकि दिलीप कुमार और बाल ठाकरे के बीच एक वक्त गहरी दोस्ती रही इस बात को उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था। बाला साहेब को उनके निरन्तर खराब हो रहे स्वास्थ्य के चलते साँस लेने में कठिनाई के कारण 2012 में मुम्बई के लीलावती अस्पताल में भर्ती किया गया।उनके चिन्ताजनक स्वास्थ्य की खबर मिलते ही उनके समर्थकों, प्रियजनों ने उनके मातुश्री आवास पर, पहुँचना शुरू कर दिया। लाख प्रयासों, दवाओं व दुआओं के बावजूद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और अखिरकार उनकी आत्मा ने 17 नवम्बर 2012 को उनका देहावसान हो गया।

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जानकारी के लिए बता दें उस समय भारत के प्रधानमन्त्री डॉ॰ मनमोहन सिंह ने उनकी मृत्यु पर भेजे शोक-सन्देश में कहा था कि "महाराष्ट्र की राजनीति में बाला साहेब ठाकरे का योगदान अतुलनीय था। उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।" लोक सभा में प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने भी उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। इतना ही  नहीं उनकी शव यात्रा में लगभग 20 लाख लोग शामिल हुए थे।


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