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मां सरस्वती की पूजा और किसानो के चेहरे पर खुशी की चमक बिखेरता है बसंत पंचमी का त्यौहार

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 10 , 2019 , 11:31 IST

हिंदू कैलेंडर के हिसाब से बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की बसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है। बता दें इस साल देशभर में बसंत पंचमी का त्योहार 10 फरवरी  को मनाया जा रहा है। यह त्यौहार मनाने के पीछे की मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का जन्म हुआ था।

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इस दिन सरस्वती माता की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। बता दें बसंत पंचमी को श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। देवी सरस्वती को ज्ञान, कला, बुद्धि, गायन-वादन की अधिष्ठात्री हमेशा से ही माना जाता है। इसलिए इस दिन विद्यार्थी, लेखक और कलाकार देवी सरस्वती की उपासना करते हैं और उनकी पूजा आरती भी करते हैं।

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विद्यार्थी अपनी किताबें, लेखक अपनी कलम और कलाकार अपने म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट और बाकी चीजें को मां सरस्वती के सामने रखकर पूजा करते हैं। जानकारी के लिए बता दें यह त्योहार पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। सरस्वती पूजा या बसंत पंचमी के दिन लोग पीले कपड़े पहनकर पूजा करते हैं। भारतीय पंचांग में 6 ऋतुएं हैं, इनमें से वसंत ऋतुओं का राजा भी माना जाता है।

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वसंत ऋतु का आगमन पतझड़ के बाद होता है। वहीं वसंत ऋतु का आगमन नई फसल के उगने और फूलों के खिलने का त्योहार भी कहा जाता है। मान्यता तो ऐसी भी है कि वंसत पचंमी से ठंड कम हो जाती है और दिन तेजी से बड़े होने लगते हैं। जबकि वहीं मंदिरों में भगवान की मूर्ति का वसंती कपड़ों और फूलों से श्रंगार किया जाता है। दुनिया भर में धूम-धाम के साथ यह महोत्सव सेलिब्रेट किया जाता है।

ऋतुओं का राजा है बसंत-:

इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनते है. पीले रंग को बसंत की प्रतीक माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिसकी पीली किरणें इस बात का प्रतीक है कि सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए। बंसत ऋतु को सभी मौसमों में बड़ा माना जाता है, इसलिए इसे ऋतुओं का राजा भी कहा जाता है।

आज के दिन कुंभ का तीसरा शाही स्नान-:

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, बसंत पंचमी के दिन को मां सरस्वती का जन्मदिन माना जाता है। इस दिन उनकी विशेष पूजा होती है और पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। साल 2019 की बसंत पंचमी और भी खास है, क्योंकि इस दिन प्रयागराज में चल रहे कुंभ में शाही स्नान होगा। बसंत पंचमी के दिन होने वाले इस स्नान में करोड़ों लोग त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने आएंगे।

क्यों मां सरस्वती को कहा जाता है ज्ञान की देवी-:

हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए। लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था।

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ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। बहते पानी की धारा में आवाज़ आई, हवा सरसराहट करने लगा, जीव-जन्तु में स्वर आने लगा, पक्षी चहचहाने लगे। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन बसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।


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