नेशनल

MeToo: BCCI के CEO राहुल जौहरी को मिला क्लीन चीट, जांच समिति ने कहा-आरोप में दम नहीं

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1686
| नवंबर 21 , 2018 , 19:44 IST

BCCI के सीईओ राहुल जोहरी को यौन उत्पीड़न मामले में क्लीन चीट मिल गई है। मामले की जांच में जूटी तीन सदस्यीय जांच समिति ने जौहरी को इस मामले में दोषी नहीं पाया है। पिछले महीने मी टू मूवमेंट के तहत एक महिला ने जौहरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। जौहरी को पिछले तीन हफ्ते से छुट्टी पर जाने को बाध्य किया गया लेकिन अब वह काम पर लौट सकते हैं। जांच समिति के एक सदस्य ने हालांकि उनके लिए ‘लैंगिक संवेदनशील काउंसिलिंग' की सिफारिश की है। इस मुद्दे पर दो सदस्यीय प्रशासकों की समिति का रुख बंटा हुआ था।

अध्यक्ष विनोद राय ने जौहरी के काम पर लौटने को स्वीकृति दी जबकि डायना एडुल्जी ने कुछ सिफारिशों के आधार पर उनके इस्तीफे की मांग की जिसमें काउंसिलिंग भी शामिल है। जांच समिति के प्रमुख न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राकेश शर्मा ने अपने निष्कर्ष में कहा, कार्यालय या कहीं और यौन उत्पीड़न के अरोप झूठे, आधारहीन और मनगढ़ंत हैं जिनका मकसद राहुल जौहरी को नुकसान पहुंचाना था।

तीन सदस्यीय जांच समिति में दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष बरखा सिंह और वकील कार्यकर्ता वीना गौड़ा भी शामिल थीं। वीना ने बर्मिंघम में चैंपियन्स ट्रॉफी के दौरान एक शिकायतकर्ता से ‘अनुचित बर्ताव' के लिए जौहरी की काउंसिलिंग की सलाह दी। वीना ने हालांकि कहा कि जौहरी के खिलाफ यौन उत्पीड़न का कोई मामला नहीं बनता।

सीओए ने 25 अक्टूबर को गठित इस समिति को जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। इसकी रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को भी सौंपी जाएगी। सीओए की सदस्य एडुल्जी चाहती हैं कि बुधवार को यह रिपोर्ट प्रकाशित नहीं हो और उन्होंने मांग की कि इसका अध्ययन करने के लिए उन्हें कम से कम कुछ दिन का समय दिया जाए।

सीओए प्रमुख विनोद राय ने हालांकि समिति के सदस्यों और बीसीसीआई की विधि टीम के समक्ष रिपोर्ट को खोल दिया। एडुल्जी समिति के गठन के खिलाफ थी और चाहती थी कि आरोपों के आधार पर जौहरी को बर्खास्त किया जाए जबकि राय का मानना था कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार किसी कार्रवाई से पहले जांच जरूरी है।

जौहरी के खिलाफ सबसे पहले यौन दुराचार के आरोप एक गुमनाम ईमेल में लगाए गए थे जिसे ट्विटर पर डाला गया लेकिन बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया। आरोपी का दावा था कि जौहरी की पिछली नौकरी में वह उसके साथ काम करती थी। इसके बाद दो और आरोप लगाए गए।

इसमें से एक सिंगापुर में रहने वाली मीडिया पेशेवर और एक अन्य महिला थी जो जौहरी के साथ उनके पिछले संस्थान में काम कर चुकी थी। इन दोनों महिलाओं ने स्काइप के जरिए सुनवाई में हिस्सा लिया। इसके अलावा बीसीसीआई की भ्रष्टाचार रोधी इकाई के पूर्व प्रमुख नीरज कुमार, बीसीसीआई कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी, आईपीएल याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा और मुंबई के पूर्व कप्तान शिशिर हट्टनगड़ी ने भी सुनवाई में हिस्सा लिया।

इसके अलावा जौहरी के खिलाफ बीसीसीआई की महिला कर्मचारी के साथ भी अनुचित व्यवहार का आरोप लगा। इस महिला कर्मचारी ने हालांकि सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया। जौहरी गवाही के लिए पहुंचने वाले अंतिम व्यक्ति थे जो दो दिन चली।

गौरतलब है कि राहुल जौहरी पर एक महिला पत्रकार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। महिला पत्रकार हरनिद्ध कौर ने MeToo अभियान के तहत राहुल जौहरी पर नौकरी देने के बहाने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

महिला पत्रकार ने ट्‌वीट किया था- जब राहुल डिस्कवरी चैनल के अधिकारी थे उस वक्त मैं उनसे मिली थी। उन्होंने मुझे कॉफी पीने के लिए बुलाया। इसके बाद वे मुझे नौकरी की बात करने के लिए किसी जगह चलने को कहा, वे मुझे अपने घर लेकर गये, मुझसे यह नहीं बताया कि उनकी पत्नी घर पर नहीं है और मेरे साथ दुर्व्यवहार किया, मैं आज भी उस सदमे से निकल नहीं पायी हूं।


कमेंट करें