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शौर्य और संगीत का मेगा शो है 'बीटिंग द रिट्रीट' सेरेमनी, जानिए क्यों है खास

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 30 , 2018 , 15:11 IST

सोमवार को 'बीटिंग द रिट्रीट' के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हुआ। 'बीटिंग द रिट्रीट' चार दिवसीय गणतंत्र दिवसीय गणतंत्र दिवस समारोहों के अंत का प्रतीक है। विजय चौक पर होने वाले 'बीटिंग द रिट्रीट' में तीनों सेनाओं की ओर से 26 परफार्मेंस दी गई।

जानिए क्यों है खास

गणतंत्र दिवस का समारोह 26 जनवरी को नहीं 29 जनवरी को समाप्त होता है। कार्यक्रम में भारती की सैन्य शक्ति, समृद्ध विविधता और सांस्कृतिक विरासत का दिखाया जाता है। समारोह में तीन सेनाओं के बैंड और अर्धसैनिक बल बीएसएफ के जवान मौजूद होते है्ं। 'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह के मुख्य अतिथि राष्‍ट्रपति होते हैं। यहां प्रेसीडेंट्स बॉडीगार्ड्स के सुरक्षा घेरे में आते हैं। उनके आने के बाद प्रेसीडेंट्स बॉडीगार्ड्स के कमांडर की ओर से राष्‍ट्रपति को नेशनल सैल्‍यूट देते हैं। इसके साथ ही तिरंगा फहराया जाता और राष्‍ट्रीय गान होता है।

'बीटिंग द रिट्रीट' सैन्य व अ‌र्द्ध सैन्य बलों की प्राचीन परम्परा है। युद्ध के बाद जब सैन्य टुकड़ियां वापस अपने कैंपों में लौटती थीं तो युद्ध के तनाव को कम करने एवं मनोरंजन के लिए बैंड की प्रस्तुति का कार्यक्रम रखा जाता था। भारत में इस कार्यक्रम के साथ ही गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों की औपचारिक समाप्ति होती है।

कार्यक्रम में पुलिस ब्रास बैंड द्वारा हिन्दी व अंग्रेजी की क्लासिकल धुनों के साथ ही नई एवं पुरानी हिन्दी फिल्मों के 10 चुनिंदा गानों की आकर्षक संगीतमय प्रस्तुति दी गई। तीनों बैंड द्वारा मार्चपास्ट करते हुए बैंडवार व सामूहिक प्रस्तुतियां भी दी गई। संगीतमयी प्रस्तुतियों का समापन 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' धुन से हुआ। अंत में आतिशबाजी भी की गई।


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