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जब खुद सारथी बन कृष्ण ने तोड़ा था अर्जुन का मोह और दिया गीता का दिव्य ज्ञान

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 30 , 2018 , 17:28 IST

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों में काफी असमंजस की स्थिति है। इस बार जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाएगी। इस बार यह त्योहार 2 सितम्बर और 3 सितम्बर दोनो ही दिन मनाया जाने वाला है। वैष्णव कृष्ण जन्माष्टमी 3 सितंबर को है जबकि 2 सितंबर यानी कि पहले दिन वाली जन्माष्टमी मंदिरों और ब्राह्मणों के घर पर मनाई जाएगी। 3 सितंबर यानी कि दूसरे दिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव सम्प्रदाय के लोग मनाते हैं। इस बार श्रीकृष्‍ण की 5245वीं जयंती है।

भगवान श्री कृष्ण ने कई ऐसे चमत्कार किए, जिसको आज भी सुनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने रासलीला भी रचाई और गीता के उपदेश से असत्य पर सत्य की जीत हुई। श्री कृष्ण ने अर्जुन को वो दिव्य ज्ञान दिया जो आज भी प्रासंगिक है।

कुरुक्षेत्र की भूमि पर चचेरे भाइयों के बीच होने जा रहे महायुद्ध में एक तरफ कौरव और दूसरी तरफ पांडवों की सेना खड़ी थी। अपने सामने प्रतिद्वंदी शत्रु के रूप में खड़े परिजनों, गुरु और मार्गदर्शकों को देखकर अर्जुन के हाथ कांपने लगे। जिनके साथ उन्होंने अपना बचपन व्यतीत किया था, आज कैसे वो उन पर प्रहार कर सकते थे। जिन्होंने उन्हें एक सफल जीवन से जुड़ी हर शिक्षा प्रदान की,  उन्हें अर्जुन कैसे अपने शत्रु के तौर पर समाप्त कर सकता था। 

आंखों के सामने का दृश्य और होने वाले परिणाम के बारे में सोच-सोच कर महायोद्धा अर्जुन भी अपने क्षत्रिय धर्म से विचलित होने लगे। वह किसी भी हाल में गुरु द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह और अन्य परिजनों पर अपना तीर नहीं चला सकते थे।

अर्जुन ने अपनी स्थिति अपने सारथी और मित्र भगवान श्रीकृष्ण को बताई। ऐसे में अर्जुन के मानसिक द्वंद को शांत करने के लिए भगवान कृष्ण उनके उपदेशक भी बने। उन्होंने रणभूमि में अर्जुन को जीवन की वास्तविकता और मनुष्य धर्म से जुड़े कुछ ऐसे उपदेश दिए जिन्हें “गीता” में संग्रहित किया गया। हिन्दू धर्म की पवित्र पुस्तक गीता, भगवान श्रीकृष्ण के उन्हीं उपदेशों का संग्रहण है, जो उन्होंने महाभारत के युद्ध के दौरान अपने मार्ग से भटक रहे अर्जुन को प्रदान किए थे।

उस समय भगवान कृष्ण द्वारा कहे गए उपदेशों ने ना सिर्फ अर्जुन की दुविधा को शांत किया बल्कि आज भी वह मनुष्य के कई सवालों का जवाब हैं। गीता के उपदेश मनुष्य जीवन की कई समस्याओं का समाधान तो हैं ही लेकिन साथ ही साथ यह एक सफल जीवन जीने में भी मददगार साबित हो सकते हैं।

यहां देखें गीता के वो मुख्य उपदेश जो आज भी हमें जीने की राह दिखाते हैं ...

* मृत्यु से कैसा भय-:

K8

*अपनी इच्छाओं पर रखें नियंत्रण-:

K7

* कर्म करें फल की इच्छा न करें-:

K6

* कर्म करते रहना चाहिए-: 

K5

* मन पर नियंत्रण-:

K2

* मानव शरीर अस्थाई और आत्मा स्थाई है...

K4

* दुख का आकलन-:

K3

* क्रोध पर रखें नियंत्रण-:

K1

*क्यों व्यर्थ चिंता करते हो...


K9


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