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राजीव गांधी की तरह पीएम मोदी की हत्या की थी प्लानिंग, ऐसे रची जा रही थी साज़िश

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जून 8 , 2018 , 16:07 IST

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में कुछ दिनों पहले हुई 5 गिरफ्तारियों के बाद कई खुलासे हुए हैं। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करने की साजिश का खुलासा हुआ है। पुणे पुलिस ने दिल्ली में रोना विलसन के घर पर मिले पत्र में नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश होने की बात कही है। पुणे पुलिस ने भीमा-कोरेगांव हिंसा के संबंध में छापेमारी की और एक चिट्ठी बरामद की। चिट्ठी में जो कुछ लिखा है वो पुलिस के लिए पैरों तले जमीन खिसकने वाली बात थी। पुलिस ने पत्र का एक हिस्सा जारी किया है।

चिट्ठी में बताया जा रहा है कि देश की जनता खासतौर से दलित समुदाय भय के माहौल में जी रही है। देश में जिस तरह का माहौल बना हुआ है उसके लिए मोदी राज जिम्मेदार है, और उससे मुक्ति पाने के लिए राजीव गांधी जैसे हत्याकांड को अंजाम देने की जरूरत है। अदालत में सरकारी वकील ने कहा कि पत्र से साफ है कि पीएम मोदी को मरवाने की साजिश रची जा रही थी।   

चिट्टी में लिखा है, नरेंद्र मोदी एक फांसीवादी-हिन्दूवादी नेता हैं। बिहार और पश्चिम बंगाल में भले वह सरकार बनाने में सफल ना हुए हो पर देश के 15 राज्यों में उनकी सरकारें बनी है। अगर इसी गति से वे आगे बढ़ते रहे तो सभी पार्टियों के लिए परेशानी बढ़ जाएगी।

पत्र में आगे लिखा है, इसलिए अब कुछ वरिष्ठ कामरेडों ने साल 2016 के ओडीएच मिशन से भी क्रूर कदम उठाने की ठानी है। मोदी राज को खत्म करना होगा। इसके लिए राजीव गांधी हत्याकांड जैसी एक घटना को अंजाम देना होगा। सह आत्मघाती साबित हो सकता है। इसके असफल होने की भी संभावना है। लेकिन पार्टी में इस प्रस्ताव को रखा जाना चाहिए। नरेंद्र मोदी को मारने के लिए रोड शो के दौरान इस घटना को अंजाम देने का सबसे सही समय होगा।

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माओवादियों द्वारा फिदायीन हमले कर हत्या करने की साजिश का खुलासे पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह खुलासा देश को चौंकाने वाला है।

गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचा जाना देश का दुर्भाग्य है। गिरिराज सिंह ने इस बात की भी आशंका जताई कि अगर इस खुलासे के बाद देश सतर्क नहीं हुआ और ऐसे खुलासे को हल्के में लिया गया तो आने वाले दिनों में कोई भी बड़ी घटना हो सकती है।

कैसे हुई थी राजीव गांधी की हत्या

21 मई 1991 की रात धीरे धीरे अपने चढ़ाव पर थी। कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी मंच पर दस्तक दे चुके थे। बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनने के लिए आए थे। लेकिन उस भीड़ में उनकी जिंदगी के सूरज को अस्त करने की तैयारी पूरी थी। हमलावर अपने नापाक इरादे को अंजाम देने के लिए मंच की तरफ बढ़ रहे।

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(फाइल फोटो)

रात 10 बजकर 21 मिनट पर कानो, करीब 30 वर्ष की लड़की चंदन का हार लेकर राजीव गांधी की तरफ बढ़ती है, वो उनके पैर छूती है और ठीक उसी वक्त एक धमाका होता है। गौर करने की बात है कि राजीव गांधी के सम्मान में गीत गाया जा रहा था कि राजीव का जीवन हमारा जीवन है। अगर वो जीवन इंदिरा गांधी के बेटे को समर्पित नहीं है तो उस जीवन का माएने कहां का। 27 वर्ष पहले 1991 में आत्मघाती हमले में राजीव गांधी ने शहादत दे दी। इससे पहले  श्रीलंका दौरे में गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान भी उन पर हमला किया गया था। ये बात अलग है कि राजीव गांधी बाल बाल बच गए।

 


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