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भूटान चुनाव: जनता और नेताओं के बीच 'हैप्पीनेस' बना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 17 , 2018 , 13:09 IST

भूटान में राजशाही खत्म होने के बाद तीसरी बार चुनाव चल रहे हैं। दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों की तरह यहां भी चुनाव में कई मुद्दे है। इन मद्दों में रोजगार, भ्रष्टाचार, आर्थिक विकास, और हैप्पीनेस जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस सभी मुद्दों में हैप्पीनेस सबसे बड़ा मुद्दा निकल कर सामने आया है।

Bhutan-Elections-11-MAINभूटान में इस बार के चुनाव में स्वास्थ्य, पानी, रोजगार के अलावा भ्रष्टाचार, ग्रामीण इलाकों में गरीबी और स्थानीय अपराध भी यहां चुनावी मुद्दे हैं। नेता इन समस्याओं के ऐसे हल निकालने के दावे कर रहे हैं, जिनसे देश की तरक्की के साथ-साथ देश की सकल राष्ट्रीय खुशहाली को बढ़ावा मिल सके।

15 सितंबर को हुई पहले राउंड की वोटिंग

भूटान में जारी चुनावों में पहले राउंड का चुनाव 15 सितंबर को हुआ जिसपर भारत और चीन के सामरिक पर्यवेक्षकों की नजर लगी है। चुनावों का दूसरा दौर 18 अक्टूबर को होना है। बाकी देशों की तरह यहां का मुख्य मुद्दा आर्थिक विकास, रोजगार, अपराध और भ्रष्टाचार है। इस सभी मुद्दोंके साथ हैप्पीनेस सबसे बड़ा मुद्दा निकल कर सामने आया है।

भूटान में मुख्य चुनावी मुद्दे

भूटान में जनतांत्रिक सरकार की भूमिका अहम हो गई है और इसके चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा ही भूटान की अहम विदेश नीति की भावी दिशा तय की जा रही है। इसलिये भूटान की नई सरकार भारत औऱ चीन के साथ अपने रिश्तों को किस तरह पारिभाषित करती है अब यह भारत के लिए  चुनौती का विषय बन गई है। अगर पिछले कुछ दिनों से भारत के साथ भूटान के रिश्तों को देखें तो यह पता चलेगा कि भारत को पड़ोसी देशों से मिल रही चुनौती में अब नया नाम भूटान का जुड़ सकता है।

सरकार बदली तो पड़ेगा रिश्तों पर असर

आपको बता दें कि भूटान के साथ भारत के संबंध अच्छे रहे हैं, लेकिन डीपीटी अगर सत्ता में आई तो यह समीकरण बदल सकता है। 2008 से 2013 तक जब डीपीटी पार्टी की सरकार भूटान में थी तब भारत और भूटान के बीच रिश्तों में कुछ खास गर्माहट नजर नहीं आई। इसकी खास वजह थी कि तत्तकालीन भूटान के प्रधानमंत्री और डीपीटी की पार्टी लाइन चीन के प्रति झुकाव रखती है।


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