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बिन्नी बंसल ने खोला राज, गूगल रिजेक्ट नहीं करता तो शुरू नहीं होती Flipkart

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 10 , 2018 , 14:19 IST

देश की प्रमुख ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट की शुरूआत कैसे हुई यह बहुत से लोगों को पता ही नहीं है। कंपनी के को-फाउंडर में से एक बिन्नी बंसल ने इस राज से भी पर्दा उठा दिया है। बिन्नी बंसल ने सेप लेब द्दारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि अगर 2005 व 2006 में गूगल उनके नौकरी के आवेदन को नहीं रिजेक्ट करता, तो फिर फ्लिपकार्ट की शुरूआत ही नही होती। वहीं अमेजन जैसी कम्पनी से टक्कर लेने से पहले वो और सचिन इसी में एक साथ ही काम करते थे।

एक कार्यक्रम में अपनी करियर के बारें कुछ बातों को साझा करते हुए बिनी बंसल ने आगे कहा कि पत्नी को फ्लिपकार्ट से खरीदारी कराना हमारे लिए एक बड़ी चुनौतीयों में से एक है। हर रोज वे बिग-बास्केट से फल और सब्जियां खरीदती हैं और आज भी मैं कहता हूं कि फ्लिपकार्ट के नए फीचर्स ट्राई करो।

अमेजन में की थी सचिन ने बिन्नी की पैरवी

गूगल में नौकरी नहीं मिलने के बाद सचिन बंसल ने बिन्नी के लिए अमेजन में पैरवी की थी। 2006 में बिन्नी को अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी मिली, जिसके बाद सचिन को काफी तगड़ा बोनस भी मिला लेकिन आठ महीने बाद ही बिन्नी ने नौकरी छोड़ दी, जिसका खामियाजा सचिन को भुगतना पड़ा था। ऐसा इसलिए क्योंकि सचिन को बोनस में मिला सारा पैसा वापस करना पड़ा था।

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आईआईटी दिल्ली में बिताए गए लम्हें सबसे यादगार

बिन्नी ने कहा आईआईटी दिल्ली में बिताया गया समय जीवन का सबसे यादगार पल है। दिल्ली स्थित आईआईटी में एक अलग तरह का माहौल है। आप अपने डिपार्टमेंट, कोर्स और बैचमेट से ज्यादा हॉस्टल के साथियों के साथ ज्यादा वफादार रहते हैं।

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दूसरे हॉस्टल के साथियों से हमेशा प्रतिद्वंदता रहती थी। यह सब खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा दिखती थी। यहां पर जो दोस्त बने वो अभी भी जीवन से जुड़े हुए हैं। बंगलूरू में कई साल तक इन्हीं दोस्तों के पास फ्लिपकार्ट शुरू करने से पहले रहा था।

कस्टमर को खुद करते थे सामान की डिलीवरी

बिन्नी ने कहा कि वो और सचिन कई बार सामान की खुद ही डिलीवरी करते थे, ताकि कस्टमर का फीडबैक जान सकें। कई बार लोग उन्हें पहचानते नहीं थे, लेकिन कुछ थे जो पहचान कर सेल्फी व ऑटोग्रॉफ लेते थे। एक कस्टमर और उसके परिवार ने पहचान कर चाय और मिठाई का जो दौर शुरू किया, वो कही घंटों तक चला, क्योंकि ग्राहक हमेशा भगवान के समान होता है।

बिन्नी ने शुरुआती जिंदगी के बारे में बताया कि स्पोर्ट्स उनका पैशन था। पढ़ाई में ठीक-ठाक थे। ऐसे में आईआईटी में जाना आश्चर्यजनक रहा।


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