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लगन और कठिन परिश्रम का दूसरा नाम है "मैरी कॉम" (जन्मदिन विशेष )

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 1 , 2018 , 09:18 IST

1 मार्च 1983 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में जन्मी मैरी कॉम अपने मुक्केबाजी के दम पर दुनिया भर में धूम मचाया। अपनी लगन और कठिन परिश्रम से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा का अमीरी और गरीबी से कोई संबंध नहीं होता।

अगर आपके अन्दर कुछ करने का जज्बा है तो, सफलता हर हाल में आपके कदम चूमती है। पांच बार ‍विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की विजेता रह चुकी मैरी कॉम अकेली ऐसी महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने अपनी सभी 6 विश्व प्रतियोगिताओं में पदक जीता है।

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जीवन सफर-:

मैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम (एम सी मैरी कॉम) का जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हुआ। उनके पिता एक गरीब किसान थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लोकटक क्रिश्चियन मॉडल स्कूल (कक्षा 6 तक) और सेंट जेविएर स्कूल (कक्षा 8 तक) में हुई। इसके बाद उन्होंने कक्षा 9 और 10 की पढाई के लिए इम्फाल के आदिमजाति हाई स्कूल में दाखिला लिया लेकिन वह मैट्रिकुलेशन की परीक्षा पास नहीं कर सकीं।

मैट्रिकुलेशन की परीक्षा में दोबारा बैठने का उनका विचार नहीं था इसलिए उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और आगे की पढाई ‘नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ओपन स्कूलिंग’ (NIOS), इम्फाल, से की। उन्होंने अपना स्नातक चुराचांदपुर कॉलेज से पूरा किया।

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उनको खेल-कूद का शौक बचपन से ही था और उनके ही प्रदेश के मुक्केबाज डिंग्को सिंह की सफलता ने उन्हें मुक्केबाज बनने के लिए और प्रोत्साहित कर दिया। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग की शुरुआत मणिपुर राज्य के बॉक्सिंग कोच नरजीत सिंह की देख-रेख में मणिपुर की राजधानी इम्प्फाल में शुरू कर दिया।

मुक्केबाजी करियर और सफलताएं एक बार बॉक्सिंग रिंग में उतरने का फैसला करने के बाद मैरी कॉम ने कभी-भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक महिला होने के नाते उनका सफर और भी मुश्किल था पर उनका हौसला भी फौलाद का बना है – एक बार जो ठान लिया वो कर के दिखाना है।

राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप के अलावा मैरी कॉम अकेली ऐसी महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने अपनी सभी 6 विश्व प्रतियोगिताओं में पदक जीता है। एशियन महिला मुक्केबाजी प्रतियोगिता में उन्होंने 5 स्वर्ण और एक रजत पदक जीता है, महिला विश्व वयस्क मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में भी उन्होंने 5 स्वर्ण और एक रजत पदक जीता है, एशियाई खेलों में मैरी ने 2 रजत और 1 स्वर्ण पदक जीता है।

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2012 के लन्दन ओलंपिक्स में कांस्य पदक जीत कर उन्होंने देश का नाम ऊंचा किया। इसके अलावा मैरी ने इंडोर एशियन खेलों और एशियन मुक्केबाजी प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक जीता है। 1 अक्टूबर 2014 को मैरी ने इन्चिओन, दक्षिण कोरिया, एशियन खेलों में स्वर्ण जीत कर नया इतिहास रचा।

वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं। सन् 2001 में प्रथम बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतने वाली मैरी कॉम अब तक 10 राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं। मुक्केबाजी में देश को गौरवान्वित करने वाली मैरी को भारत सरकार ने वर्ष 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष 2006 में पद्मश्री और 2009 में उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

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उपलब्धियां पुरस्कार और सम्मान-:

पद्म भूषण (खेल), 2013
अर्जुन पुरस्कार (बॉक्सिंग), 2003
पद्म श्री (खेल), 2010
राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए मनोनित किया गया, 2007
लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स – पीपल ऑफ़ द इयर, 2007
सीएनएन-आईबीएन – रिलायंस इंडस्ट्रीज रियल हीरोज अवार्ड्, 2008
पेप्सी-एमटीवी यूथ आइकॉन 2008
ऑल इंडिया बॉक्सिंग एसोसिएशन (एआईबीए) द्वारा ‘मैग्निफिसेंट मैरी’ का संबोधन, 2008
राजीव गाँधी खेल रत्न, 2009
इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन द्वारा ‘महिला बॉक्सिंग की एम्बेसडर’ घोषित, 2009
सहारा स्पोर्ट्स अवार्ड: स्पोर्ट्सविमेन ऑफ़ द इयर, 2010

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सुपर फाइट लीग (एस.एफ.एल.) मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स रियलिटी शो सुपर फाइट लीग (एस.एफ.एल.) ने मैरी की उपलब्धियों और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें अपने शो का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया। मैरी के जीवन पर बनी फिल्म ‘मैरी कॉम’ बॉक्सिंग की दुनिया में अपनी उपलब्धियों और सफलताओं के कारण मैरी कॉम आज हर भारतीय महिला के लिए प्रेरणास्रोत (रोल मॉडल) हैं।

उनके जीवन पर एक फिल्म भी बनी जिसका प्रदर्शन 2014 मे हुआ। ओमंग कुमार द्वारा निर्देशित इस फिल्म में उनकी भूमिका प्रसिद्द नायिका प्रियंका चोपड़ा ने निभाई। लोगों ने इस फिल्म को पसंद किया और मैरी की तरह ये फिल्म भी बहुत सराही गयी।

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निजी जीवन मैरी कॉम का विवाह के. ओन्लेर कॉम से 2005 में हुआ। उनकी ओन्लेर से मुलाकात सन 2001 में दिल्ली में हुई जब वो राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने पंजाब जा रही थीं। कॉम दंपत्ति के 3 बच्चे हैं। मैरी जानवरों के अधिकारों और रक्षा के मुद्दों से भी जुड़ी हैं।

उन्होंने सर्कसों में हाथियों के प्रयोग पर रोक लगाने की मांग की है। उनके अनुसार सर्कसों में जानवरों से क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया जाता है जिसे रोका जाना चाहिए। वो जानवरों की रक्षा से जुड़ी संस्था PETA से जुड़ी हैं और उनकी मुहीम ‘कम्पैसनेट सिटीजन’ का जोरदार समर्थन किया है। इसके तहत उन्होंने सारे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों को विद्यालयों के पाठ्यक्रम में इस तरह के पाठ रखने की गुजारिश की है।


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