राजनीति

गोरखपुर हार के हैं बड़े राजनीतिक मायने, BJP के लिए 2019 बड़ी चुनौती!

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 15 , 2018 , 14:48 IST

गोरखपुर की हार बड़ी हार है। योगी जी पांच बार वहां के सांसद रहे। मुख्यमंत्री बनने के बाद ये उनकी सबसे बडी चुनौती थी पर चक्रव्यूह जिसकी तैयारी महीनों से चल रही थी, उसके सामने बीजेपी की पूरी ताक़त और रणनीति पस्त हो गई। ये मामूली हार नहीं है। 2019 के पहले बीजेपी के गढ़ को हासिल कर विपक्ष ने ये साबित कर दिया कि अब बीजेपी के लिए लोकसभा की लड़ाई आसान नहीं है। पूरी ताक़त झोंकने के बावजूद राजस्थान और मध्यप्रदेश के उपचुनावों में बीजेपी की हार हुई और अब यूपी, बिहार की हार।
2014 के बाद 16 लोकसभा उपचुनावों में बीजेपी सिर्फ़ दो पर ही चुनाव जीत सकी है। क्या मोदी का तिलस्म कम हुआ है ? क्या इस सरकार के फ़ैसले इस पर भारी पड़ रहे है ? जनता अब कोई चांस नहीं लेना चाहती?

Modi 1

नोटबंदी हो जीएसटी, राज्यों में जीत के बाद सरकार कहती थी कि जनता ने हमारे फ़ैसलों पर मुहर लगी दी, लेकिन नीरव मोदी की लूट के बाद क्या जनता ने सरकार को नकार दिया ? वोटर ये ज़रूर सोच रहा है कि हिन्दुत्व के नाम पर अगर मोदी जी फिर आ गए तो पता नहीं, अब क्या कर दे। आम चर्चा ये भी है कि 90% मीडिया अपने निजी स्वार्थों के लिए सरकार के गलत को भी सही बताती है।

Yogi

बीजेपी को अब सिर्फ़ ध्रुवीकरण का सहारा है, क्योंकि इस सरकार के आने के बाद आम आदमी की ज़िन्दगी आसान नहीं हुई जैसा कि वादा था बल्कि सरकार के सुधार के नाम पर किए गए बड़े फ़ैसलों से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। विपक्ष की एकता रेत की तरह है कब मौक़ापरस्ती की तेज़ बयार में बह जाए ,धाराशही हो जाए कोई नहीं जानता ?

हारी हुई बाज़ी को जीत में बदलना नरेन्द्र मोदी को अच्छी तरह आता है लेकिन इस बार जनता का मत और क़िस्मत उनके साथ होगी या किसी और के, ये वक्त कह देगा ।

 

 


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