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प्रणब मुखर्जी के RSS मुख्यालय जाने पर आडवाणी ने तोड़ी चुप्पी, पढ़िये क्या-क्या कहा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 8 , 2018 , 19:12 IST

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय जाने पर पहली बार विचार व्यक्त किया है। आडवाणी ने भारतीय राष्ट्रवाद पर विचार व्यक्त करने को देश के समसामयिक इतिहास की ‘‘महत्वपूर्ण घटना’’ बताया और कहा कि इस प्रकार खुलेपन की भावना और आपसी सम्मान के साथ विचारों के आदान प्रदान से सहिष्णुता और सौहार्द की भावना तैयार करने में मदद मिलेगी।

आडवाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निमंत्रण स्वीकार करने के लिये प्रणब मुखर्जी और उन्हें आमंत्रित करने के लिये सरसंघचालक मोहन भागवत की सराहना की। प्रणब मुखर्जी कांग्रेस से कई दशकों तक जुड़े रहे। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि दोनों के विचार अपने आप में महत्वपूर्ण विषय को परिलक्षित करते हैं।

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आरएसएस के आजीवन स्वयंसेवक आडवाणी ने कहा कि उनका मानना है कि प्रणब मुखर्जी और भागवत ने विचारधाराओं एवं मतभेदों से परे संवाद का सही अर्थो में सराहनीय उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि दोनों ने भारत में एकता के महत्व को रेखांकित किया जो बहुलतावाद समेत सभी तरह की विविधता को स्वीकार एवं सम्मान करती है। आडवाणी ने मोहन भागवत की ओर से वार्ता के माध्यम से देश के विभिन्न वर्गो तक पहुंच बनाने के प्रयासों की सराहना की।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘इस प्रकार खुलेपन की भावना और आपसी सम्मान के साथ विचारों के आदान प्रदान से सहिष्णुता, सौहार्द और सहयोग की भावना तैयार करने में मदद मिलेगी जो हमारे साझा सपनों के भारत के निर्माण में सहायक होगा।’’ प्रणब मुखर्जी की सराहना करते हुए आडवाणी ने कहा कि उन्होंने आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करके विनम्रता और सदाचार का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके लम्बे और व्यापक अनुभव ने उन्हें एक राजनेता बनाया है जो विभिन्न विचारधाराओं और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों के बीच चर्चा परिचर्चा एवं सहयोग की जरूरत को समझता है। आडवाणी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ का पूरे भारत में विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि संवाद की भावना का सम्मान करते हुए आरएसएस राष्ट्र के कई वर्गों के साथ संबंध स्थापित कर रहा है, ये बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि खुले माहौल और आपसी सम्मान के माहौल में होने वाले ऐसे बातचीत से देश में सहिष्णुता सदभाव और सहयोग की भावना विकसित होगी।


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